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5% खेल आरक्षण के तहत नियुक्ति पर बड़ा एक्शन, सचिन काळोर की सरकारी सेवा समाप्त।

महाराष्ट्र सरकार ने खेल आरक्षण के तहत नियुक्त सहायक कक्ष अधिकारी सचिन चिमराव काळोर की सरकारी सेवा समाप्त कर दी है। 24 जुलाई 2026 को जारी शासन आदेश के अनुसार, उनकी नियुक्ति के लिए प्रस्तुत खेल प्रमाणपत्र की पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द कर दी गई थी और उन्हें 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत किसी भी पद के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। इस फैसले के खिलाफ की गई पहली और दूसरी अपील भी खारिज हो चुकी हैं। महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण में दायर मामले में भी उन्हें अंतिम राहत नहीं मिली। इसके बाद सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 के सामान्य प्रशासन विभाग के शासन निर्णय के प्रावधानों के तहत उनकी सेवा समाप्त करने का फैसला लिया। यह मामला सरकारी नौकरियों में खेल आरक्षण के तहत प्रस्तुत प्रमाणपत्रों के सत्यापन, पात्रता और नियुक्ति के बाद सामने आने वाली विसंगतियों पर प्रशासनिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करता है। हालांकि, सरकारी आदेश में प्रमाणपत्र को सीधे तौर पर "फर्जी" नहीं कहा गया है, बल्कि पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द किए जाने और खेल आरक्षण के लिए अयोग्य ठहराए जाने का उल्लेख है।

Anshuman Mishra24 जुल. 2026, 09:04 PM IST
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5% खेल आरक्षण के तहत नियुक्ति पर बड़ा एक्शन, सचिन काळोर की सरकारी सेवा समाप्त।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने खेल आरक्षण के तहत सरकारी नौकरी पाने वाले सहायक कक्ष अधिकारी सचिन चिमराव काळोर की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया है। कृषि, पशुसंवर्धन, दुग्ध व्यवसाय विकास एवं मत्स्य व्यवसाय विभाग की ओर से 24 जुलाई 2026 को जारी शासन आदेश में कहा गया है कि काळोर की नियुक्ति के लिए प्रस्तुत खेल प्रमाणपत्र से संबंधित पुनः सत्यापन रिपोर्ट को रद्द किया जा चुका है और उन्हें 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत किसी भी पद के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इस फैसले के खिलाफ उनकी पहली और दूसरी अपील भी खारिज हो चुकी हैं। इसके बाद सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 के सामान्य प्रशासन विभाग के शासन निर्णय के प्रावधानों के तहत उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया है।


क्या है पूरा मामला?

शासन आदेश के मुताबिक सचिन काळोर की नियुक्ति महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की अनुशंसा के आधार पर सहायक कक्ष अधिकारी के पद पर हुई थी। उन्हें खुले-खिलाड़ी वर्ग के तहत इस पद के लिए अनुशंसित किया गया था और उन्होंने 1 जून 2018 को सरकारी सेवा ज्वाइन की थी। नियुक्ति के समय उन्होंने लखनऊ, उत्तर प्रदेश में आयोजित 10वीं वरिष्ठ तलवारबाजी चैंपियनशिप-1998 में तीसरा स्थान हासिल करने से संबंधित खेल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उनकी खेल पात्रता की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।


प्रमाणपत्र की दोबारा जांच के बाद बदला पूरा मामला

सरकारी दस्तावेज के अनुसार, बाद में सचिन काळोर के खेल प्रमाणपत्र की पुनः जांच की गई। उपसंचालक, क्रीड़ा एवं युवक सेवा, पुणे विभाग के 17 फरवरी 2020 के आदेश के तहत पहले प्रस्तुत पुनः सत्यापन रिपोर्ट को रद्द कर दिया गया और काळोर को 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत किसी भी पद के लिए अपात्र घोषित किया गया। यानी जिस खेल उपलब्धि के आधार पर उन्हें आरक्षण का लाभ मिला था, उसकी पात्रता बाद की जांच में स्वीकार नहीं की गई।


यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 24 जुलाई 2026 के शासन आदेश में प्रमाणपत्र को सीधे "फर्जी प्रमाणपत्र" नहीं कहा गया है। दस्तावेज में यह दर्ज है कि पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द की गई और उम्मीदवार को खेल आरक्षण के लिए अयोग्य ठहराया गया। इसलिए उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर मामले को खेल प्रमाणपत्र की वैधता और पात्रता से जुड़ा विवाद कहना अधिक सटीक होगा।


दोनों अपीलों में भी नहीं मिली राहत

श्री काळोर ने 17 फरवरी 2020 के फैसले के खिलाफ संयुक्त निदेशक, क्रीड़ा एवं युवक सेवा के समक्ष पहली अपील दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई के बाद उनकी पहली अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने आयुक्त, क्रीड़ा एवं युवक सेवा, महाराष्ट्र राज्य के समक्ष दूसरी अपील दाखिल की। यह दूसरी अपील भी 10 सितंबर 2024 के आदेश के जरिए खारिज कर दी गई। इस आदेश की प्रति जुलाई 2026 में संबंधित विभाग को प्राप्त हुई।


MAT में भी पहुंचा था मामला

इस विवाद को लेकर सचिन काळोर ने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण यानी MAT, मुंबई का भी रुख किया था। उन्होंने 2020 में मूल आवेदन संख्या 468/2020 दाखिल किया था। MAT ने 29 जुलाई 2022 को अंतरिम राहत देते हुए उनकी सेवा को तत्काल समाप्त नहीं करने का निर्देश दिया था।

बाद में 13 जून 2024 को MAT ने उनका मूल आवेदन खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि संबंधित मामले में वैकल्पिक अपीलीय उपाय उपलब्ध था और खेल विभाग के दूसरे अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष मामला लंबित था। इसलिए उस स्तर पर MAT में आवेदन दाखिल करना उचित नहीं था। न्यायाधिकरण ने अंतरिम राहत को दूसरी अपील के आदेश की जानकारी आवेदकों को दिए जाने के बाद 10 दिनों तक जारी रखने की बात कही थी।


सरकार ने सेवा समाप्त करने का आधार क्या बनाया?

शासन आदेश में सरकार ने कहा है कि खेल प्रमाणपत्र से संबंधित पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द हो चुकी है, जबकि उसके खिलाफ की गई पहली और दूसरी अपील भी खारिज हो गई हैं। इस स्थिति में सचिन काळोर 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत किसी भी पद के लिए पात्र नहीं रहे। इसी आधार पर उनकी सेवा समाप्त करने का मामला सरकार के विचाराधीन था। अंततः सामान्य प्रशासन विभाग के 12 अक्टूबर 1993 के शासन निर्णय के प्रावधानों के तहत उनकी सेवा समाप्त करने का फैसला लिया गया।


अंतरविभागीय तबादले से कृषि विभाग पहुंचे थे

शासन आदेश के अनुसार सचिन काळोर 21 जुलाई 2025 को विधि एवं न्याय विभाग से अंतरविभागीय तबादले के जरिए कृषि विभाग में आए थे। उनके खेल प्रमाणपत्र की वैधता से जुड़े मामले की जानकारी विभाग को 11 नवंबर 2025 को प्राप्त हुई। सरकार ने यह भी कहा कि उनके सेवा रिकॉर्ड की जांच में स्थायीकरण प्रमाणपत्र जारी किए जाने की कोई प्रविष्टि नहीं मिली।


अब सरकार का अंतिम आदेश क्या है?

महाराष्ट्र सरकार के 24 जुलाई 2026 के आदेश के मुताबिक सचिन चिमराव काळोर की सहायक कक्ष अधिकारी के पद पर सेवा आदेश की तारीख से समाप्त कर दी गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि अब उन्हें सहायक कक्ष अधिकारी के पद पर उनकी पिछली सेवा से संबंधित कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा और नियुक्ति से जुड़े उनके किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।


खेल आरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

महाराष्ट्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी और अन्य क्षेत्रों में अवसर देने के लिए 5 प्रतिशत खेल आरक्षण की व्यवस्था है। महाराष्ट्र के खेल विभाग के अनुसार यह व्यवस्था राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की गई है।

इस व्यवस्था में खेल प्रमाणपत्र की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरक्षण का लाभ वास्तविक खेल उपलब्धियों और निर्धारित पात्रता के आधार पर दिया जाता है। महाराष्ट्र सरकार की मौजूदा व्यवस्था में खेल प्रमाणपत्रों की सत्यापन प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों के स्तर पर जांच, उसके बाद प्रथम अपील और फिर आयुक्त स्तर पर दूसरी अपील की व्यवस्था मौजूद है।


इस मामले का महत्व क्या है?

सचिन काळोर की सेवा समाप्ति का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी नियुक्तियों में दस्तावेजों और आरक्षण पात्रता के सत्यापन की अहमियत को सामने लाता है। खेल आरक्षण का उद्देश्य वास्तविक और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में अवसर देना है। ऐसे में यदि किसी उम्मीदवार की पात्रता बाद में अमान्य पाई जाती है, तो उसका असर नियुक्ति की वैधता पर भी पड़ सकता है।

यह मामला यह भी दिखाता है कि खेल प्रमाणपत्रों की जांच केवल नियुक्ति के समय तक सीमित नहीं रहती। यदि बाद में किसी प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल उठता है, तो विभागीय पुनः सत्यापन, अपील और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए मामले की समीक्षा हो सकती है।


इस कार्रवाई से क्या फायदा हो सकता है?

सरकार की इस कार्रवाई का संभावित उद्देश्य खेल आरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना है। इससे यह संदेश जाता है कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए पात्रता दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण है और बाद में पात्रता गलत पाए जाने पर कार्रवाई हो सकती है। इससे वास्तविक खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध अवसरों की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस मामले से किसी व्यापक नीति परिवर्तन की घोषणा नहीं हुई है। 24 जुलाई 2026 के शासन आदेश का सीधा प्रभाव सचिन काळोर की सेवा समाप्ति तक सीमित है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने खेल आरक्षण की पूरी व्यवस्था में कोई नया बदलाव किया है। उपलब्ध दस्तावेज में ऐसा कोई नया आरक्षण नियम घोषित नहीं किया गया है।


क्या इस मामले को फर्जी प्रमाणपत्र का मामला कहा जा सकता है?

उपलब्ध शासन आदेश को ध्यान से पढ़ने पर इस मामले में सावधानी बरतना जरूरी है। आदेश में यह कहा गया है कि खेल प्रमाणपत्र से संबंधित पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द की गई और सचिन काळोर को 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत अयोग्य घोषित किया गया। हालांकि, GR में प्रमाणपत्र को सीधे "फर्जी" घोषित करने के आधार या जांच के विस्तृत निष्कर्ष नहीं दिए गए हैं। इसलिए खबर में इसे "खेल प्रमाणपत्र की वैधता पर विवाद" या "खेल प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बाद कार्रवाई" कहना अधिक तथ्यात्मक होगा।


महाराष्ट्र सरकार ने 24 जुलाई 2026 को जारी शासन आदेश के जरिए सहायक कक्ष अधिकारी सचिन चिमराव काळोर की सरकारी सेवा समाप्त कर दी है। मामला 1998 की तलवारबाजी प्रतियोगिता से संबंधित उस खेल प्रमाणपत्र से जुड़ा है, जिसके आधार पर उन्हें 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के तहत सरकारी नियुक्ति मिली थी। बाद में प्रमाणपत्र की पुनः सत्यापन रिपोर्ट रद्द कर दी गई और उन्हें खेल आरक्षण के तहत अयोग्य घोषित किया गया। विभागीय स्तर पर पहली और दूसरी अपील खारिज होने के बाद सरकार ने 1993 के नियमों के आधार पर सेवा समाप्ति का फैसला लिया। यह मामला सरकारी नौकरियों में खेल आरक्षण के लाभ के लिए प्रमाणपत्र सत्यापन की भूमिका और नियुक्ति के बाद सामने आने वाली पात्रता संबंधी विसंगतियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को रेखांकित करता है।