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प्रेग्नेंसी के 7वें महीने में भी फुटबॉल ट्रेनिंग, क्या गर्भ में बच्चे के लिए खतरा या फिटनेस का नया उदाहरण?
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक 7 महीने की गर्भवती फुटबॉलर का ट्रेनिंग वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में महिला खिलाड़ी को गर्भावस्था के दौरान भी अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए एक्सरसाइज करते देखा गया, जिसके बाद कई लोगों ने हैरानी जताई और सवाल उठाया कि क्या इतनी एडवांस प्रेग्नेंसी में भी इस तरह की शारीरिक गतिविधि करना सुरक्षित है? जहां कुछ लोगों ने इसे महिला की फिटनेस और आत्मविश्वास की मिसाल बताया, वहीं कई लोगों ने गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जाहिर की। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में एक्सरसाइज पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं होती, बल्कि सही तरीके और डॉक्टर की सलाह के साथ यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

गर्भावस्था में एक्सरसाइज को लेकर बदल रही है सोच
पहले गर्भवती महिलाओं को ज्यादा आराम करने और शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती थी, लेकिन अब मेडिकल रिसर्च ने यह साबित किया है कि सामान्य और स्वस्थ गर्भावस्था में नियंत्रित एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, जिन महिलाओं की प्रेग्नेंसी सामान्य है और जिन्हें कोई मेडिकल समस्या नहीं है, वे नियमित शारीरिक गतिविधि जारी रख सकती हैं। संस्था गर्भवती महिलाओं को हर सप्ताह लगभग 150 मिनट तक मध्यम स्तर की एरोबिक एक्टिविटी करने की सलाह देती है।
क्या 7 महीने की प्रेग्नेंसी में फुटबॉल ट्रेनिंग सुरक्षित है?
फुटबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें तेज दौड़ना, अचानक दिशा बदलना, कूदना और शरीर से टकराने का खतरा रहता है। इसलिए आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान फुटबॉल जैसे कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, प्रोफेशनल एथलीट्स की स्थिति सामान्य महिलाओं से अलग हो सकती है। जो खिलाड़ी गर्भधारण से पहले लंबे समय से उच्च स्तर की ट्रेनिंग कर रही होती हैं, वे डॉक्टर, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट और ट्रेनर की निगरानी में अपनी गतिविधियों को बदलकर जारी रख सकती हैं। ACOG के अनुसार, जो महिलाएं गर्भावस्था से पहले नियमित रूप से ज्यादा इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज करती थीं, वे अपनी गतिविधियों को परिस्थितियों के अनुसार जारी रख सकती हैं, लेकिन मेडिकल निगरानी जरूरी है।
गर्भावस्था में एक्सरसाइज करने के फायदे
कमर और पीठ दर्द में राहत मिल सकती है
कब्ज जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं
अत्यधिक वजन बढ़ने का खतरा कम हो सकता है
गर्भावधि मधुमेह यानी Gestational Diabetes का जोखिम कम हो सकता है
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
मूड और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है
डिलीवरी के बाद शरीर को रिकवर करने में मदद मिल सकती है
गर्भावस्था में एक्सरसाइज से गर्भावधि मधुमेह, प्री-एक्लेम्पसिया और कुछ अन्य जटिलताओं के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
सातवें महीने में शरीर में होते हैं बड़े बदलाव
प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर यानी सातवें महीने तक पहुंचते-पहुंचते महिला के शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं।
इस समय:
पेट का आकार काफी बढ़ जाता है
शरीर का संतुलन बदलने लगता है
हार्मोनल बदलाव के कारण जोड़ और मांसपेशियां प्रभावित होती हैं
जल्दी थकान महसूस हो सकती है
सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है
ऐसे में पहले जैसी ट्रेनिंग करना हर महिला के लिए संभव नहीं होता। एक्सरसाइज की गति, समय और तरीका शरीर की स्थिति के अनुसार बदलना पड़ता है।
कौन सी एक्सरसाइज गर्भावस्था में सुरक्षित मानी जाती हैं?
तेज गति से पैदल चलना
तैराकी
प्रेग्नेंसी योग
हल्की स्ट्रेचिंग
लो-इंपैक्ट एरोबिक्स
हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
इन गतिविधियों से शरीर सक्रिय रहता है और मांसपेशियों की ताकत बनी रहती है।
किन गतिविधियों से बचना चाहिए?
फुटबॉल, हॉकी जैसे कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स
घुड़सवारी
स्कीइंग
बहुत भारी वजन उठाना
ऐसी एक्सरसाइज जिनमें पेट पर दबाव ज्यादा पड़े
खासकर तीसरे ट्राइमेस्टर में शरीर का बैलेंस बदलने के कारण चोट का खतरा बढ़ सकता है।
एक्सरसाइज करते समय इन चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें
पेट में तेज दर्द
योनि से ब्लीडिंग
चक्कर आना
सीने में दर्द
सांस लेने में अचानक परेशानी
बच्चे की हलचल कम महसूस होना
पानी जैसा रिसाव
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्या हर गर्भवती महिला एक्सरसाइज कर सकती है?
इसका जवाब है — हर महिला की स्थिति अलग होती है। जिन महिलाओं की प्रेग्नेंसी सामान्य है, वे डॉक्टर की सलाह के बाद एक्सरसाइज कर सकती हैं। लेकिन जिन महिलाओं को प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, समय से पहले प्रसव का खतरा या अन्य मेडिकल कॉम्प्लिकेशन हैं, उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
एक्सपर्ट की सलाह: प्रेग्नेंसी में फिटनेस का मतलब शरीर पर दबाव डालना नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान फिट रहने का उद्देश्य रिकॉर्ड बनाना या ज्यादा कठिन ट्रेनिंग करना नहीं होना चाहिए। इस समय लक्ष्य होना चाहिए कि शरीर स्वस्थ रहे, ऊर्जा बनी रहे और मां व बच्चे दोनों सुरक्षित रहें। 7 महीने की गर्भवती फुटबॉलर का उदाहरण यह दिखाता है कि प्रेग्नेंसी और फिटनेस एक साथ चल सकते हैं, लेकिन इसके लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति, डॉक्टर की सलाह और शरीर के संकेतों को समझना सबसे जरूरी है।
