health
फिटनेस का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी! प्रोटीन पाउडर के इस इंग्रेडिएंट से रहें सावधान
फिटनेस और बॉडी बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन पाउडर को लेकर एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। मसल्स बढ़ाने और शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए लाखों लोग रोजाना प्रोटीन सप्लीमेंट का सेवन करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ प्रोटीन पाउडर में मौजूद अतिरिक्त इंग्रेडिएंट्स शरीर के पाचन तंत्र और गट हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

खासकर फ्लेवर्ड प्रोटीन पाउडर में इस्तेमाल किए जाने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर्स (Artificial Sweeteners) और कुछ एडिटिव्स को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पदार्थ कुछ लोगों में पेट फूलने, गैस, अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है और यह शरीर की संवेदनशीलता, सेवन की मात्रा और लंबे समय तक इस्तेमाल पर निर्भर करता है।
प्रोटीन पाउडर में मौजूद स्वीटनर्स बन सकते हैं परेशानी की वजह
बाजार में उपलब्ध कई प्रोटीन पाउडर में चीनी की जगह सुक्रालोज (Sucralose), एस्पार्टेम (Aspartame), एसेसल्फेम-के (Acesulfame-K) जैसे कृत्रिम मिठास देने वाले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका उद्देश्य प्रोडक्ट का स्वाद बेहतर बनाना और कैलोरी कम रखना होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में इन स्वीटनर्स का ज्यादा सेवन आंतों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। इससे गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन पर असर पड़ सकता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
गट माइक्रोबायोम क्यों है जरूरी?
मानव शरीर की आंत में अरबों की संख्या में सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये पाचन प्रक्रिया, इम्यून सिस्टम और शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है तो व्यक्ति को गैस, पेट फूलना, कब्ज, अपच और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि लंबे समय तक अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और कुछ कृत्रिम स्वीटनर्स का सेवन आंतों के बैक्टीरिया को प्रभावित कर सकता है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इस बात पर शोध कर रहे हैं कि अलग-अलग स्वीटनर्स का गट हेल्थ पर कितना प्रभाव पड़ता है और किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।
शुगर अल्कोहल भी बढ़ा सकते हैं पेट की परेशानी
कई प्रोटीन पाउडर में शुगर अल्कोहल (Sugar Alcohols) जैसे एरिथ्रिटोल, सोर्बिटोल और माल्टिटोल का इस्तेमाल किया जाता है। ये पदार्थ कम कैलोरी वाले स्वीटनर्स के रूप में उपयोग किए जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में इन्हें पचाना मुश्किल हो सकता है। इसके कारण पेट में गैस बनना, पेट फूलना, ऐंठन और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील होता है, उन्हें ऐसे उत्पादों से परेशानी हो सकती है।
व्हे प्रोटीन भी कुछ लोगों के लिए समस्या बन सकता है
प्रोटीन सप्लीमेंट्स में सबसे लोकप्रिय व्हे प्रोटीन है, जो दूध से तैयार किया जाता है। हालांकि जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस यानी दूध में मौजूद लैक्टोज पचाने में परेशानी होती है, उन्हें व्हे प्रोटीन लेने के बाद गैस, पेट दर्द, सूजन या दस्त की समस्या हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए व्हे आइसोलेट या प्लांट बेस्ड प्रोटीन जैसे विकल्प बेहतर साबित हो सकते हैं। हालांकि किसी भी सप्लीमेंट का चयन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत के अनुसार होना चाहिए।
क्या सभी प्रोटीन पाउडर नुकसानदायक होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कहना सही नहीं है कि हर प्रोटीन पाउडर शरीर के लिए खराब होता है। अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन सप्लीमेंट सही मात्रा में लेने पर शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं। खासकर एथलीट, बॉडी बिल्डर, अधिक शारीरिक मेहनत करने वाले लोग या ऐसे व्यक्ति जिन्हें भोजन से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पाता, उनके लिए प्रोटीन पाउडर उपयोगी हो सकता है। समस्या तब होती है जब लोग बिना जरूरत, बिना जानकारी या विज्ञापनों के प्रभाव में आकर जरूरत से ज्यादा मात्रा में इसका सेवन शुरू कर देते हैं।
प्रोटीन पाउडर खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन पाउडर खरीदते समय केवल यह नहीं देखना चाहिए कि उसमें कितने ग्राम प्रोटीन मौजूद है। इसके साथ-साथ पूरे लेबल को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। खरीदारी करते समय ध्यान रखें:
- ज्यादा आर्टिफिशियल स्वीटनर्स वाले उत्पादों से बचें।
- कम से कम अतिरिक्त एडिटिव्स वाला प्रोटीन पाउडर चुनें।
- प्रमाणित और भरोसेमंद ब्रांड का इस्तेमाल करें।
- अपनी जरूरत के हिसाब से ही प्रोटीन लें।
- पेट संबंधी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
प्राकृतिक प्रोटीन स्रोत अब भी बेहतर विकल्प
डाइट विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से प्रोटीन लेना सबसे अच्छा विकल्प है। दालें, अंडे, दूध, पनीर, मछली, चिकन, सोया, बीन्स और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। प्रोटीन पाउडर को भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
प्रोटीन पाउडर फिटनेस लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे खरीदते समय केवल विज्ञापन और प्रोटीन की मात्रा देखकर फैसला करना सही नहीं है। इसमें मौजूद स्वीटनर्स, एडिटिव्स और अन्य इंग्रेडिएंट्स कुछ लोगों की गट हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी सप्लीमेंट को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले उसकी गुणवत्ता, जरूरत और शरीर की प्रतिक्रिया को समझना जरूरी है। सही जानकारी और संतुलित इस्तेमाल से प्रोटीन सप्लीमेंट फायदेमंद हो सकता है, लेकिन लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है।
