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दवा के नाम पर जहर? देहरादून में नकली दवा फैक्ट्री पकड़ी गई, जांच में जुटीं कई एजेंसियां

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश FSDA, गाजियाबाद क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक अवैध दवा निर्माण इकाई का पर्दाफाश किया गया। छापेमारी के दौरान मौके से नामी दवा कंपनियों के नाम और पैकेजिंग का इस्तेमाल कर तैयार की जा रही कथित नकली दवाएं, बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री, रैपर, लेबल, खाली डिब्बे और दवा निर्माण से जुड़े उपकरण बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।

Vindhya Dubey24 जुल. 2026, 09:06 PM IST
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दवा के नाम पर जहर? देहरादून में नकली दवा फैक्ट्री पकड़ी गई, जांच में जुटीं कई एजेंसियां

यह मामला सामने आने के बाद दवा सुरक्षा और मरीजों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक फैक्ट्री तक सीमित मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे कई राज्यों में फैला नकली दवा सप्लाई नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

ब्रांडेड दवाओं के नाम पर बनाया जा रहा था नकली माल

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम, पैकेजिंग डिजाइन और लेबलिंग की नकल कर नकली दवाएं तैयार कर रहे थे। इन दवाओं को इस तरह पैक किया जा रहा था कि आम ग्राहक और कई बार दवा विक्रेता भी पहली नजर में असली और नकली दवा के बीच अंतर नहीं पहचान पाते। अधिकारियों ने बताया कि बरामद दवाओं और कच्चे माल के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन दवाओं में कौन-कौन से सक्रिय तत्व मौजूद थे, दवा की गुणवत्ता कितनी खराब थी और क्या इनमें कोई हानिकारक पदार्थ मिलाया गया था।

कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस अवैध दवा निर्माण इकाई से तैयार नकली दवाओं की सप्लाई उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी की जा सकती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री से दवाएं किन डीलरों, मेडिकल स्टोर संचालकों और सप्लाई चैनल के माध्यम से बाजार तक पहुंचाई जा रही थीं। अधिकारियों ने फैक्ट्री से मिले दस्तावेजों, बिलों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य जानकारियों को जांच का हिस्सा बनाया है। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कारोबार में कितने लोग शामिल हैं और क्या इससे जुड़े अन्य ठिकाने भी मौजूद हैं।

नकली दवाएं मरीजों के लिए क्यों हैं खतरनाक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नकली दवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसी दवाओं में कई बार जरूरी सक्रिय तत्व मौजूद नहीं होते या उनकी मात्रा बेहद कम होती है। इससे मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाता और बीमारी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक, हार्मोन, हृदय रोग, डायबिटीज और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाएं विशेष रूप से खतरनाक हो सकती हैं। इनके सेवन से इलाज में देरी, दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) और मरीज की हालत बिगड़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

दवा बाजार में नकली कारोबार बड़ी चुनौती

भारत में दवा उद्योग दुनिया के बड़े दवा बाजारों में शामिल है, लेकिन नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं का कारोबार लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। नकली दवाएं न केवल मरीजों की जान जोखिम में डालती हैं, बल्कि असली दवा कंपनियों की प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी असर डालती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की सप्लाई चेन की नियमित निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, लाइसेंस जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई के जरिए इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई

फैक्ट्री सील करने के बाद संबंधित अधिकारियों ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। बरामद सामग्री को जब्त कर आगे की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां आरोपियों से जुड़े अन्य लोगों और संभावित सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

देहरादून में सामने आया यह मामला केवल नकली दवाओं की फैक्ट्री का खुलासा नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि बाजार में पहुंचने वाली दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को दवा खरीदते समय लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवाएं लेनी चाहिए और संदिग्ध पैकेजिंग, कम कीमत या संदिग्ध दवा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। नकली दवा कारोबार के खिलाफ हुई यह कार्रवाई अब आगे की जांच पर निर्भर करेगी, जिससे यह पता चलेगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और कितने मरीजों तक ऐसी दवाएं पहुंच चुकी थीं।