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BMC के HMIS पर खर्च हुए 100 करोड़, अब नए सॉफ्टवेयर से अस्पतालों को डिजिटल बनाने की तैयारी।
मुंबई: BMC के अस्पतालों में हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब नौ वर्षों में इस सिस्टम पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद अब इसे नए सिरे से लागू करने की कोशिश की जा रही है। HMIS का उद्देश्य मरीजों के रिकॉर्ड, अपॉइंटमेंट, जांच रिपोर्ट, बेड प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन को डिजिटल और एकीकृत बनाना है। यदि नया सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो मरीजों को तेज सेवाएं, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड और बेहतर बेड उपलब्धता जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। साथ ही BMC अस्पतालों में संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन भी अधिक कुशल हो सकता है। हालांकि, नई व्यवस्था की सफलता के लिए पुराने सिस्टम की कमियों की समीक्षा, डेटा सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होगी।

मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अस्पतालों में मरीजों की सेवाओं और अस्पताल प्रबंधन को डिजिटल बनाने के लिए शुरू किया गया हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम को लागू करने पर करीब नौ वर्षों में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद अब इसे नए सिरे से लागू करने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पहले चुनी गई कंपनी के साथ काम खत्म होने के बाद BMC अब नए सॉफ्टवेयर और नई व्यवस्था के जरिए HMIS को दोबारा मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में 100 करोड़ रुपये के कुल खर्च और नौ वर्षों की अवधि से संबंधित आधिकारिक BMC दस्तावेज की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं मिलती है। इसलिए इस आंकड़े को रिपोर्ट में किए गए दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, BMC के आधिकारिक हेल्थ पोर्टल और हालिया रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि नगर निकाय अब अस्पतालों में HMIS के विस्तार, डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन बेड उपलब्धता, मरीजों के डिजिटल रिकॉर्ड और AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।
HMIS क्या है और अस्पतालों के लिए क्यों जरूरी है
हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी HMIS एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य अस्पताल के विभिन्न कामकाज को एकीकृत और व्यवस्थित करना होता है। इसमें मरीज का पंजीकरण, ओपीडी, डॉक्टर की सलाह, जांच, लैब रिपोर्ट, दवाओं का रिकॉर्ड, भर्ती और डिस्चार्ज प्रक्रिया, ऑपरेशन, बेड प्रबंधन और अस्पताल से जुड़े प्रशासनिक आंकड़ों को डिजिटल तरीके से संभालना शामिल हो सकता है। एक प्रभावी HMIS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अस्पताल में मरीज से जुड़ी जानकारी अलग-अलग कागजी फाइलों या अलग-अलग विभागों में बिखरी रहने के बजाय एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध हो सकती है। इससे डॉक्टरों को मरीज का पिछला उपचार और जांच रिपोर्ट जल्दी देखने में मदद मिलती है। मरीजों को बार-बार वही जानकारी देने या एक ही जांच दोहराने की जरूरत कम हो सकती है और अस्पताल प्रशासन को संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में सहायता मिल सकती है।
BMC के लिए HMIS का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि मुंबई का नगर निकाय देश के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य नेटवर्क में से एक संचालित करता है। इसके अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी संख्या में मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि डिजिटल सिस्टम सही तरीके से काम करे, तो मरीजों की लंबी कतार, कागजी रिकॉर्ड, रिपोर्ट खोजने में लगने वाला समय और अस्पतालों के बीच जानकारी साझा करने की समस्या को कम किया जा सकता है।
नौ साल और 100 करोड़ रुपये के खर्च का दावा क्यों महत्वपूर्ण है
अखबार की रिपोर्ट में सामने आया 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक सॉफ्टवेयर खरीदने का मामला नहीं है। किसी बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य नेटवर्क में HMIS लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर के साथ हार्डवेयर, सर्वर या क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, तकनीकी सहायता, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और लगातार रखरखाव जैसी कई चीजों की आवश्यकता होती है। लेकिन इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी यदि सिस्टम अपेक्षित तरीके से काम नहीं करता, तो सवाल केवल आर्थिक नुकसान का नहीं रहता।
इसका सीधा असर मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों पर पड़ता है। डॉक्टरों को यदि डिजिटल सिस्टम के बजाय अलग-अलग रिकॉर्ड देखने पड़ें, मरीजों को बार-बार पंजीकरण कराना पड़े या अस्पतालों के बीच डेटा उपलब्ध न हो, तो डिजिटल व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो जाता है। यही वजह है कि अब नए HMIS को लागू करते समय BMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नया सॉफ्टवेयर तैयार करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पिछली व्यवस्था से मिली कमियों को दूर किया जाए और नया सिस्टम वास्तव में अस्पताल के दैनिक कामकाज में उपयोगी साबित हो।
नायर अस्पताल के चयन से शुरू हुई थी प्रक्रिया
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, BMC की पिछली HMIS प्रक्रिया में मुंबई के बीवाईएल नायर अस्पताल को शुरुआती अस्पताल के रूप में चुना गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके बाद सिस्टम को अन्य अस्पतालों तक विस्तार देने की कोशिश की गई, लेकिन लगभग नौ वर्षों के दौरान अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो सके। अब BMC की रणनीति में नए सिरे से HMIS को लागू करने और अस्पतालों में डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में BMC अधिकारियों ने भी नगर निकाय के अस्पतालों में HMIS के कार्यान्वयन को तेज करने और AI आधारित तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य मरीजों की देखभाल, अस्पताल प्रशासन और प्रदर्शन की निगरानी को बेहतर बनाना है।
BMC के डिजिटल हेल्थ पोर्टल पर भी वर्तमान में सार्वजनिक अस्पतालों में उपलब्ध बेड की जानकारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी और मरीजों के लिए डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाएं दिखाई जा रही हैं। BMC ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर मरीजों के लिए एक ऐप की जानकारी भी दी है, जिसके जरिए अपॉइंटमेंट, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन और लैब रिपोर्ट जैसी सेवाओं तक डिजिटल पहुंच का लक्ष्य रखा गया है। यह संकेत देता है कि नगर निकाय अब स्वास्थ्य सेवाओं को अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाकर अधिक एकीकृत डिजिटल हेल्थ सिस्टम की दिशा में ले जाना चाहता है।
नए HMIS से मरीजों को क्या फायदा हो सकता है
यदि नया HMIS पूरी तरह और सही तरीके से लागू होता है, तो इसका सबसे सीधा लाभ मरीजों को मिल सकता है। ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल अपॉइंटमेंट से अस्पतालों में शुरुआती कतार कम हो सकती है। मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध होने से डॉक्टर को उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, लैब रिपोर्ट और जांच के परिणाम डिजिटल रूप से उपलब्ध होने पर मरीजों को कागजी रिपोर्ट संभालने की परेशानी कम हो सकती है। अलग-अलग BMC अस्पतालों के बीच डेटा साझा करने की सुविधा विकसित होने पर मरीज के इलाज का रिकॉर्ड अधिक आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है।
BMC के लिए सबसे महत्वपूर्ण संभावित लाभ अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाओं और अन्य संसाधनों की बेहतर निगरानी हो सकता है। आधिकारिक BMC हेल्थ पोर्टल पर सार्वजनिक अस्पतालों में लाइव बेड उपलब्धता की सुविधा पहले से प्रदर्शित की जा रही है। भविष्य में यदि ऐसी सेवाएं व्यापक HMIS से प्रभावी रूप से जुड़ती हैं, तो मरीजों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस अस्पताल में किस प्रकार की सुविधा या बेड उपलब्ध है।
अस्पताल प्रबंधन के लिए भी बड़ा बदलाव
HMIS का महत्व केवल मरीजों के डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। एक मजबूत सिस्टम अस्पताल प्रशासन को यह समझने में मदद कर सकता है कि किस अस्पताल में कितने मरीज आ रहे हैं, किस विभाग पर सबसे ज्यादा दबाव है, कितने बेड उपलब्ध हैं, किन दवाओं की मांग बढ़ रही है और किन सेवाओं में अधिक संसाधनों की जरूरत है। इस तरह का डेटा BMC को स्वास्थ्य बजट और संसाधनों का अधिक वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल करने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो प्रशासन वहां अतिरिक्त डॉक्टर, नर्स, उपकरण या बेड की आवश्यकता का आकलन कर सकता है।
HMIS से स्वास्थ्य निगरानी को भी मजबूती मिल सकती है। मुंबई जैसे बड़े महानगर में मलेरिया, डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस और अन्य संक्रामक बीमारियों के मामलों की निगरानी के लिए समय पर और गुणवत्तापूर्ण डेटा बेहद महत्वपूर्ण है। शोध में मुंबई क्षेत्र में HMIS से मिले मलेरिया निगरानी डेटा का इस्तेमाल भी किया गया है, जिससे पता चलता है कि स्वास्थ्य डेटा केवल अस्पताल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि बीमारी के रुझानों को समझने और भविष्य की स्वास्थ्य रणनीति बनाने में भी उपयोगी हो सकता है।
AI और डिजिटल हेल्थ के साथ जुड़ता नया मॉडल
BMC की मौजूदा दिशा केवल HMIS तक सीमित नहीं दिखती। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, नगर निकाय AI आधारित डायग्नोस्टिक्स, स्मार्ट ओपीडी और ऑनलाइन बेड आवंटन जैसी तकनीकों पर भी काम करने की योजना बना रहा है। यदि इन प्रणालियों को HMIS के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता काफी बढ़ सकती है। AI का इस्तेमाल डॉक्टरों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें निर्णय लेने में सहायता देने, मेडिकल इमेजिंग और डायग्नोस्टिक डेटा के विश्लेषण में मदद करने, मरीजों की प्राथमिकता तय करने और अस्पताल के संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए डेटा की गुणवत्ता, सिस्टम की विश्वसनीयता और डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण बेहद जरूरी होगा।
सबसे बड़ी चुनौती: सिस्टम बनाना नहीं, उसे सफलतापूर्वक चलाना
BMC के सामने सबसे बड़ा सबक यही है कि केवल महंगा सॉफ्टवेयर खरीदने से डिजिटल हेल्थ सिस्टम सफल नहीं होता। HMIS की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन, प्रशासनिक कर्मचारी और मरीज इसे कितनी आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं। यदि सिस्टम जटिल है, इंटरनेट या नेटवर्क कमजोर है, कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला है या अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग सॉफ्टवेयर काम कर रहे हैं, तो डिजिटल व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं मिल सकता। इसके अलावा, मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इसलिए डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और मरीजों की निजता की रक्षा को नए HMIS की प्राथमिकता बनाना जरूरी होगा।
BMC को पुराने अनुभव से क्या सीखना चाहिए
नए HMIS को लागू करने से पहले BMC के लिए जरूरी होगा कि वह पिछली परियोजना की स्वतंत्र और विस्तृत समीक्षा करे। यह पता लगाया जाना चाहिए कि पुराने सिस्टम में तकनीकी समस्या कहां थी, क्या सॉफ्टवेयर अस्पतालों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं था, क्या कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला या फिर सिस्टम को अलग-अलग अस्पतालों में एकीकृत करने में समस्या आई। साथ ही, नए सिस्टम के लिए स्पष्ट प्रदर्शन मानक तय किए जाने चाहिए। उदाहरण के लिए, मरीज का पंजीकरण कितने समय में होगा, रिपोर्ट कितनी जल्दी उपलब्ध होगी, बेड की जानकारी कितनी सटीक होगी और कितने अस्पताल वास्तविक समय में एक-दूसरे से जुड़े होंगे—इन सभी के लिए मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जाने चाहिए।
पारदर्शिता भी बेहद जरूरी होगी। यदि HMIS पर सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तो परियोजना की लागत, ठेकेदार, कार्य की समयसीमा, सिस्टम की उपलब्धता और प्रदर्शन की जानकारी को यथासंभव सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे भविष्य में किसी भी परियोजना की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
मुंबई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
मुंबई की आबादी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव को देखते हुए BMC का HMIS केवल एक IT परियोजना नहीं है। यह शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल रूप से बदलने का प्रयास है। अगर नया सिस्टम सफल होता है, तो इसका फायदा लाखों मरीजों को मिल सकता है और BMC के अस्पतालों में प्रशासनिक कार्य अधिक तेज और पारदर्शी हो सकते हैं।
लेकिन अगर पिछली समस्याओं को समझे बिना केवल नया सॉफ्टवेयर लागू किया गया, तो भारी सार्वजनिक खर्च के बावजूद अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल होगा। इसलिए इस परियोजना की सफलता का पैमाना सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितने अस्पतालों में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया, बल्कि यह होना चाहिए कि मरीजों को कितनी जल्दी और बेहतर सेवा मिली, डॉक्टरों का समय कितना बचा, अस्पतालों के संसाधनों का इस्तेमाल कितना बेहतर हुआ और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार आया।
कुल मिलाकर, BMC के HMIS को लेकर सामने आई यह खबर मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के डिजिटल परिवर्तन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कथित तौर पर पुराने HMIS पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने और अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के आरोपों के बीच अब नए सिरे से सिस्टम लागू करने की कोशिश BMC के लिए एक बड़ी परीक्षा है। मौजूदा डिजिटल हेल्थ पहलों, ऑनलाइन बेड उपलब्धता, मरीज ऐप, AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और स्मार्ट अस्पताल प्रबंधन के साथ HMIS को सही तरीके से जोड़ा जाता है तो मुंबई को अधिक एकीकृत और डेटा आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मिल सकती है। लेकिन इसके लिए तकनीक के साथ-साथ पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया, मजबूत डेटा सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, नियमित ऑडिट और स्पष्ट जवाबदेही जरूरी होगी। असली सफलता तब मानी जाएगी जब HMIS कागजों और कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित न रहकर अस्पताल के रोजमर्रा के कामकाज और आम मरीज के अनुभव में वास्तविक सुधार लेकर आए।
