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हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag रीसाइक्लिंग को बना रहा आसान, घर से उठ रहा सूखा कचरा
हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag लोगों को घर से सूखा कचरा उठाने और उसे रीसाइक्लिंग तक पहुंचाने की सुविधा दे रहा है। ऐप के जरिए पिकअप बुक करने पर उपयोगकर्ताओं को रिवॉर्ड पॉइंट भी मिलते हैं। यह मॉडल स्रोत पर कचरा अलग करने को बढ़ावा देकर लैंडफिल पर दबाव कम करने, रीसाइक्लिंग बढ़ाने और लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है।

भारत: भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। घरों से निकलने वाले प्लास्टिक, कागज, कार्डबोर्ड और अन्य रिसाइक्लेबल कचरे का बड़ा हिस्सा अक्सर गीले कचरे के साथ मिल जाता है, जिससे उसे दोबारा उपयोग में लाना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रहा हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag, जो लोगों को घर बैठे सूखा कचरा रीसाइक्लिंग के लिए देने की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
Goodeebag का मॉडल सरल है। लोग घर पर सूखे और गीले कचरे को अलग करते हैं और ऐप के जरिए सूखे कचरे का पिकअप बुक करते हैं। इसके बाद कंपनी की टीम घर से कचरा एकत्र करती है और उसे अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर आगे रीसाइक्लिंग के लिए भेजती है। उपयोगकर्ताओं को कचरे की मात्रा और प्रकार के आधार पर रिवॉर्ड पॉइंट भी दिए जाते हैं, जिन्हें पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों सहित उपलब्ध रिवॉर्ड के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया लोगों के दरवाजे तक पहुंच जाती है। आमतौर पर लोगों को रिसाइक्लेबल कचरा कबाड़ी या रीसाइक्लिंग सेंटर तक ले जाना पड़ता है, लेकिन Goodeebag इस काम को घर से ही करने की सुविधा देता है। इससे लोगों के लिए कचरा अलग करना और नियमित रूप से रीसाइक्लिंग में योगदान देना आसान हो सकता है।
2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, Goodeebag उस समय करीब 4,000 परिवारों से जुड़ा था और घरों से एकत्र कचरे को प्लास्टिक, कागज, कार्डबोर्ड और अन्य श्रेणियों में अलग किया जाता था। कंपनी ने आगे अन्य शहरों में विस्तार की योजना भी बताई थी। बाद में इसके मॉडल के गुवाहाटी तक विस्तार की भी रिपोर्ट सामने आई, जहां घरों से सूखा कचरा एकत्र कर रीसाइक्लिंग कंपनियों तक पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की गई।
इस पहल का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि स्रोत पर कचरा पृथक्करण रीसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया की पहली और सबसे जरूरी कड़ी है। यदि प्लास्टिक और कागज जैसे रिसाइक्लेबल पदार्थ गीले कचरे के साथ मिल जाते हैं, तो उनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और उन्हें रीसाइकिल करना अधिक मुश्किल और महंगा हो जाता है। घर से ही कचरा अलग करने से लैंडफिल में जाने वाले कचरे को कम करने और रीसाइक्लिंग के लिए उपयोगी सामग्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Goodeebag का रिवॉर्ड मॉडल लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश भी करता है। केवल जागरूकता फैलाने के बजाय, नागरिकों को कचरा अलग करने के बदले प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे परिवारों और बच्चों में कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ऐसे मॉडल की सफलता केवल घर-घर कचरा उठाने पर निर्भर नहीं करती। यह भी जरूरी है कि एकत्र कचरा वास्तव में सही रीसाइक्लिंग चैनल तक पहुंचे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। प्लास्टिक, ई-वेस्ट, बैटरी और अन्य विशेष प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग प्रबंधन प्रणालियों की जरूरत होती है। इसलिए स्थानीय निकायों, रीसाइक्लिंग कंपनियों और नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, Goodeebag का मॉडल भारत के शहरी कचरा प्रबंधन में एक उपयोगी प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है। घर से सूखा कचरा उठाने, उसे रीसाइक्लिंग तक पहुंचाने और नागरिकों को रिवॉर्ड देने की व्यवस्था रीसाइक्लिंग को अधिक सुविधाजनक बना सकती है। यदि ऐसे मॉडल मजबूत रीसाइक्लिंग नेटवर्क और नगर निकायों के सहयोग के साथ बड़े स्तर पर लागू होते हैं, तो लैंडफिल पर दबाव कम करने, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने और नागरिकों में जिम्मेदार कचरा प्रबंधन की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
