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बारिश में क्यों बैठ जाती है आवाज? आचार्य बालकृष्ण ने बताया गले की देखभाल का आयुर्वेदिक तरीका

बारिश के मौसम में तापमान में बदलाव, नमी बढ़ने और संक्रमण फैलने के कारण कई लोगों को गले में खराश, दर्द, खांसी और आवाज बैठने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या में कई बार बोलने में दिक्कत होती है और आवाज भारी या कमजोर हो जाती है। योग गुरु और पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने भी मानसून के दौरान गला बैठने की समस्या से राहत के लिए कुछ घरेलू उपाय बताए हैं।

Vindhya Dubey24 जुल. 2026, 09:07 PM IST
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बारिश में क्यों बैठ जाती है आवाज? आचार्य बालकृष्ण ने बताया गले की देखभाल का आयुर्वेदिक तरीका

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, मौसम बदलने के समय गले की देखभाल के लिए प्राकृतिक उपायों का सहारा लिया जा सकता है। उन्होंने गले को आराम देने के लिए गर्म पानी, आयुर्वेदिक काढ़े और कुछ घरेलू उपायों को उपयोगी बताया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गले की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या गंभीर दर्द हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बारिश में क्यों बैठ जाती है आवाज?

मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है और वायरस व बैक्टीरिया के फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। सामान्य सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन, एलर्जी या गले में सूजन के कारण वोकल कॉर्ड यानी आवाज बनाने वाली नसों पर असर पड़ सकता है, जिससे आवाज भारी या बंद हो सकती है। इसके अलावा बारिश में भीगना, ठंडी चीजों का अधिक सेवन, धूल-मिट्टी और प्रदूषण भी गले की परेशानी को बढ़ा सकते हैं।

गला बैठने पर आचार्य बालकृष्ण के बताए उपाय

  • गले में खराश या आवाज बैठने पर गर्म पानी पीना राहत दे सकता है। गर्म पानी गले की सूजन को कम करने और गले को नमी देने में मदद कर सकता है।
  • गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डालकर गरारे करना गले की खराश में फायदेमंद माना जाता है। इससे गले में जमा कफ कम हो सकता है और जलन से राहत मिल सकती है।
  • आयुर्वेद में अदरक को गले के लिए उपयोगी माना जाता है। अदरक में मौजूद प्राकृतिक तत्व सूजन और गले की परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं। शहद गले को आराम देने और खांसी को कम करने में सहायक हो सकता है।
  • हालांकि, एक साल से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।
  • आयुर्वेद में तुलसी का इस्तेमाल लंबे समय से सर्दी-जुकाम और गले की समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। तुलसी, अदरक और अन्य जड़ी-बूटियों से बना काढ़ा कई लोग मानसून में लेते हैं।

लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आयुर्वेदिक उपाय का अधिक मात्रा में सेवन करने से पहले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

आवाज बैठने पर किन बातों से बचें?

  • ज्यादा देर तक लगातार बोलने से बचें

  • बहुत ठंडी चीजों का सेवन कम करें

  • धूम्रपान और धूल वाले वातावरण से बचें

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

  • शरीर को आराम दें

  • कमरे में नमी का संतुलन बनाए रखें

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

  • आवाज दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बैठी रहे

  • तेज बुखार हो

  • सांस लेने में परेशानी हो

  • निगलने में बहुत दर्द हो

  • गले में ज्यादा सूजन हो

  • खांसी लगातार बढ़ती जाए

तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

मानसून में गले को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

बारिश के मौसम में गले की समस्या से बचने के लिए साफ पानी पीना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, संतुलित आहार लेना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गला बैठना आम समस्या हो सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। घरेलू उपाय शुरुआती राहत दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाली समस्या के पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है।