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अनंतनाग में जवान की शहादत से दहला कश्मीर, 2500 संदिग्ध हिरासत में और 2 आतंकियों के ठिकाने ज़मींदोज़

कश्मीर घाटी में पुलिस जवान की हत्या के बाद सुरक्षा बलों ने अब तक का सबसे बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया है। एक तरफ जहां त्वरित कार्रवाई करते हुए दो सक्रिय आतंकवादियों के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर 2,500 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने पर घाटी की राजनीति गरमा गई है।

Sonali27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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अनंतनाग में जवान की शहादत से दहला कश्मीर, 2500 संदिग्ध हिरासत में और 2 आतंकियों के ठिकाने ज़मींदोज़
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में पुलिस हेड कांस्टेबल की कायराना आतंकी हमले में हुई शहादत के बाद सुरक्षा बलों ने घाटी में अब तक का सबसे बड़ा क्रैकडाउन शुरू कर दिया है। आतंकी हमले के महज 24 घंटे के भीतर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए दक्षिण कश्मीर के हसनपोरा और बिजबेहरा इलाकों में दो सक्रिय आतंकियों, हारून गनी और आदिल अहमद थोकर के मकानों को विस्फोट से ध्वस्त कर दिया है।
इसके साथ ही पूरे कश्मीर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाकर करीब 2,500 संदिग्ध युवाओं को हिरासत में लिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अकेले श्रीनगर से 700 से ज्यादा, बडगाम से 200 से अधिक, बारामूला से 178, गांदरबल से 100 से अधिक और दक्षिण कश्मीर के चार प्रमुख जिलों अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम व पुलवामा से दर्जनों युवाओं को पूछताछ के लिए उठाया गया है।

यह पूरी कार्रवाई 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक इलाके में हुई उस घटना के बाद शुरू हुई, जहां अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात इंडियन रिजर्व पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को एक आतंकी ने बेहद करीब से गोली मार दी थी। सीसीटीवी फुटेज में एक अकेला आतंकी वारदात को अंजाम देता दिखाई दिया था। गंभीर रूप से घायल कुरैशी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
सुरक्षा बलों की इस सख्त कार्रवाई पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घरों को ढहाने और बड़े पैमाने पर युवाओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई पर चिंता जताई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें आरोपी या आरोपी के परिजनों के मकानों पर प्रशासनिक ध्वस्तीकरण की जल्दबाजी पर रोक लगाई गई है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह पुलिस विभाग के दुख और गुस्से को समझते हैं, लेकिन इस तरह की एकतरफा या त्वरित कार्रवाई से स्थिति सुधरने के बजाय और तनावपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि जनता को विश्वास में लिए बिना हिंसा के इस चक्र को खत्म नहीं किया जा सकता। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के बल प्रयोग से एक सीमा तक ही नियंत्रण पाया जा सकता है, लेकिन इसका स्थायी समाधान तब निकलेगा जब आम जनता खुद हिंसा के खिलाफ खड़ी होगी। उधर पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य मार्ग पर पुलिस अधिकारी की हत्या एक जघन्य अपराध है, लेकिन एक हजार से अधिक युवाओं को हिरासत में लेना और संदिग्धों के परिवारों के मकान गिराना सामूहिक सजा देने जैसा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।

फिलहाल घाटी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया है, जबकि पुलिस प्रशासन की ओर से हिरासतों के आंकड़ों पर आधिकारिक बयान आना बाकी है।