government
निजी संपत्ति की सुरक्षा के लिए सेना तैनात करने का ऐतिहासिक आदेश, तेलंगाना हाई कोर्ट ने अधिकारियों को भी दी सख्त चेतावनी
निजी संपत्ति के अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक दुर्लभ और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। सिकंदराबाद की विवादित भूमि की सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती का निर्देश देते हुए अदालत ने साफ कहा कि यदि उसके आदेशों की अनदेखी जारी रही, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अवमानना कार्रवाई की जाएगी।
Sonali27 जुल. 2026, 01:23 PM IST

तेलंगाना हाई कोर्ट ने निजी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व आदेश जारी करते हुए सिकंदराबाद के बोवेनपल्ली (Bowenpally) स्थित एक विवादित निजी भूमि की सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सीधे भारतीय सेना की तैनाती का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं किया गया और भूमि पर बार-बार अवैध हस्तक्षेप तथा कब्जे की कोशिशें जारी रहीं।
यह मामला अवमानना (Contempt) याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता के.बी. राव रेड्डी ने आरोप लगाया कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन विवादित भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा। सुनवाई के दौरान हैदराबाद के पुलिस आयुक्त ए.वी. रंगनाथ भी अदालत में उपस्थित हुए और हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार किया। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों में सुरक्षा व्यवस्था में कमी और हस्तक्षेप के संकेत मिलने पर हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया।
अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे सेना के बायसन डिवीजन (Bison Division) के वरिष्ठ ब्रिगेडियर से तत्काल संपर्क कर विवादित भूमि की सुरक्षा के लिए आवश्यक संख्या में सैन्य जवानों की तैनाती सुनिश्चित करें, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार का अनधिकृत प्रवेश या कब्जा रोका जा सके।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी भविष्य में भी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अदालत ने कहा कि उसके संरक्षण संबंधी आदेशों की लगातार अनदेखी किए जाने के कारण अब कठोर कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी निजी संपत्ति की सुरक्षा के लिए सीधे सेना की तैनाती का निर्देश अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। यह आदेश इस बात का संकेत है कि यदि प्रशासन न्यायालय के आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, तो न्यायालय कानून के शासन और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए असाधारण कदम उठा सकता है।
