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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो-ऑडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे

न्यायिक कार्यवाही की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने बिना पूर्व अनुमति कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो को सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, रीपोस्ट या अपलोड करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

Sonali27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो-ऑडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट या किसी भी उच्च न्यायालय की न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निकालना (Extraction), संपादित करना (Modification), पोस्ट करना, रीपोस्ट करना, अपलोड करना, प्रसारित करना या उससे कमाई (Monetisation) करना प्रतिबंधित रहेगा। यह आदेश 24 जुलाई 2026 को पारित किया गया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन शामिल थे, ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि न्यायालय की लाइव स्ट्रीमिंग से लिए गए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटाकर, संपादित कर और सनसनीखेज तरीके से प्रसारित किए जा रहे हैं। इससे न्यायपालिका की छवि और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत से कहा कि इस विषय पर स्पष्ट नियमन आवश्यक है ताकि न्यायालय की कार्यवाही का दुरुपयोग रोका जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का किसी भी डिजिटल मंच पर उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही की गरिमा, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था आवश्यक है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश न्यायालय की कार्यवाही की समाचार रिपोर्टिंग पर लागू नहीं होगा। यानी मीडिया संस्थान अदालत की कार्यवाही की तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहले की तरह कर सकेंगे। प्रतिबंध केवल रिकॉर्ड किए गए ऑडियो-वीडियो के अनधिकृत उपयोग, संपादन, वायरल करने और व्यावसायिक इस्तेमाल पर लगाया गया है।
इस आदेश के बाद कोई भी व्यक्ति, यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अदालत की कार्यवाही के वीडियो या ऑडियो क्लिप साझा नहीं कर सकेगा। अदालत का मानना है कि इससे न्यायालय की कार्यवाही को संदर्भ से हटाकर पेश करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से छेड़छाड़ करने और गलत सूचना फैलाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।