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गिरगांव के श्री पंढरीनाथ मंदिर में सालभर गूंजता है विठ्ठल नाम; 160 वर्षों से जीवंत है वारकरी परंपरा

मुंबई के गिरगांव स्थित ठाकुरद्वार क्षेत्र में देवद ब्राह्मण समाज का श्री पंढरीनाथ (विठ्ठल-रुक्मिणी) मंदिर पिछले लगभग 160 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और वारकरी परंपरा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वर्ष के 365 दिनों तक चलने वाली अखंड कीर्तन परंपरा, प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक परंपराएं और समाजसेवा के विविध कार्य इस मंदिर को मुंबई की सांस्कृतिक धरोहरों में एक विशिष्ट स्थान दिलाते हैं।

Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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गिरगांव के श्री पंढरीनाथ मंदिर में सालभर गूंजता है विठ्ठल नाम; 160 वर्षों से जीवंत है वारकरी परंपरा
मुंबई के गिरगांव स्थित ठाकुरद्वार इलाके में बना श्री पंढरीनाथ (विठ्ठल-रुक्मिणी) मंदिर शहर के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर का इतिहास लगभग 160 वर्ष पुराना माना जाता है। समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल वास्तुकला और पारंपरिक स्वरूप को आज भी सुरक्षित रखा गया है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान बरकरार है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही गर्भगृह में भगवान विठ्ठल-रुक्मिणी के साथ शिवलिंग भी विराजमान है। मुंबई में इस तरह की व्यवस्था वाले मंदिर बहुत कम हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान गणेश, कालभैरव, गरुड़, नंदी और हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। चांदी से सुसज्जित गर्भगृह, चांदी के दरवाजे और मंदिर का स्वर्ण कलश श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

मंदिर प्रशासन के अनुसार यहां वर्ष के सभी 365 दिनों में प्रतिदिन रात्रि को अखंड हरिनाम कीर्तन की परंपरा निभाई जाती है। टाल-मृदंग की मधुर ध्वनि के बीच होने वाले भजन-कीर्तन वारकरी संप्रदाय की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस भक्ति आयोजन में शामिल होकर विठ्ठल नाम का गुणगान करते हैं। धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ मंदिर ट्रस्ट सामाजिक दायित्व भी निभा रहा है। ट्रस्ट की ओर से सामूहिक उपनयन संस्कार, सामूहिक विवाह, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता, विधवा पुनर्वास, युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन तथा अन्य समाजोपयोगी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इसी कारण यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा और संस्कारों का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

तेजी से बदलती मुंबई में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए यह मंदिर आज भी श्रद्धा, वारकरी परंपरा और समाजसेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने पहुंचते हैं। श्री पंढरीनाथ मंदिर आज भी मुंबई की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।