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वकालत की डिग्री पर बड़ा फैसला: BCI करेगा लॉ कॉलेजों की गुणवत्ता की जांच, कमियां मिलीं तो संबद्धता होगी रद्द

देश में कानूनी शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए BCI ने सख्त रुख अपनाया है। कॉलेजों में फैकल्टी, लाइब्रेरी, मूट कोर्ट से लेकर अग्नि सुरक्षा तक हर व्यवस्था की जांच होगी। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले संस्थानों पर कार्रवाई तय है।

Sonali27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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वकालत की डिग्री पर बड़ा फैसला: BCI करेगा लॉ कॉलेजों की गुणवत्ता की जांच, कमियां मिलीं तो संबद्धता होगी रद्द
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, रजिस्ट्रार, डीन और विधि विभाग प्रमुखों को जारी सर्कुलर में कहा है कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल लॉ कॉलेजों को संबद्धता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार यह निगरानी करनी होगी कि संस्थान कानूनी शिक्षा के तय मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। BCI ने कहा कि अदालतें कई बार इस बात पर चिंता जता चुकी हैं कि कई विश्वविद्यालय बिना उचित निरीक्षण और सत्यापन के लॉ कॉलेजों को संबद्धता दे देते हैं। इसके कारण कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के.आर. सुदर्शन बनाम बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एवं पुडुचेरी में हुई सुनवाई के दौरान अदालत की मौखिक टिप्पणियों के बाद जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी शिक्षा देने वाले संस्थानों में मौजूद कमियों को लेकर चिंता जताई थी। केवल दस्तावेज नहीं, मौके पर होगी जांच BCI ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय निरीक्षण के दौरान केवल हलफनामों, फोटो या ऑनलाइन भेजी गई जानकारी पर निर्भर नहीं रह सकते। इसके लिए विशेषज्ञ और सक्षम निरीक्षण टीम बनानी होगी, जो हर लॉ कॉलेज का मौके पर जाकर परीक्षण करेगी।

बीसीआई के निरीक्षण में लॉ कॉलेजों की कक्षाओं, पुस्तकालय, रीडिंग रूम, नई किताबों और जर्नल, ई-डेटाबेस, इंटरनेट, मूट कोर्ट, लीगल एड क्लिनिक, सेमिनार हॉल, स्वच्छता, दिव्यांग छात्रों की सुविधाओं और अग्नि सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। ये सभी मानक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के तहत परखे जाएंगे। फैकल्टी को लेकर भी बीसीआई ने सख्ती दिखाई है। निरीक्षण टीम शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया, नियमित उपस्थिति, बैंक के जरिए वेतन भुगतान, UGC वेतन मानकों और पूर्णकालिक शिक्षकों की पर्याप्त संख्या की जांच करेगी। केवल निरीक्षण के दिन शिक्षकों की उपस्थिति या कागजी रिकॉर्ड दिखाना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।


बीसीआई ने वीकेंड, इवनिंग, शिफ्ट आधारित और कम अवधि वाले लॉ कोर्स पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। कानून की पढ़ाई नियमित कक्षाओं के माध्यम से कराने पर जोर दिया गया है। ऐसे पाठ्यक्रमों के जरिए पढ़ाई करने वाले छात्रों को भविष्य में वकालत की अनुमति नहीं दिए जाने की चेतावनी भी दी गई है। नियमित लॉ कोर्स में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे की पढ़ाई और प्रति सप्ताह कम से कम 30 घंटे का शिक्षण कार्यक्रम जरूरी बताया गया है। प्रॉक्सी अटेंडेंस या शिक्षण के निर्धारित घंटों को कम करने जैसी व्यवस्था पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी और संबंधित संस्थान में नए दाखिलों पर रोक लगाई जा सकती है।


बीसीआई ने विश्वविद्यालयों को सर्कुलर मिलने के तीन कार्य दिवस के भीतर इसकी पुष्टि करने, एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और अपने अधीन आने वाले सभी लॉ कॉलेजों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। निरीक्षण, जांच और रिपोर्ट की पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। समय पर कार्रवाई नहीं होने पर मामला बीसीआई की सक्षम समिति के समक्ष रखा जा सकता है। जांच में यदि किसी लॉ कॉलेज में जरूरी आधारभूत सुविधाओं, पर्याप्त शिक्षकों, पुस्तकालय या अन्य संसाधनों की कमी मिलती है अथवा BCI के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो विश्वविद्यालय को संबद्धता निलंबित या वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। साथ ही, केवल विश्वविद्यालय से संबद्धता पर्याप्त नहीं होगी; प्रत्येक लॉ कॉलेज और उसके पाठ्यक्रम के पास वैध और वर्तमान BCI मान्यता होना जरूरी होगा।