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पंढरपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की विठ्ठल-रुक्मिणी की शासकीय महापूजा

आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार तड़के पत्नी अमृता फडणवीस के साथ पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में शासकीय महापूजा की। इस अवसर पर धाराशिव जिले के मानकरी वारकरी दंपती बाबासाहेब माने और प्रभावती माने को पूजा का विशेष सम्मान दिया गया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संपन्न इस महापूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली और अच्छी वर्षा की प्रार्थना की।

Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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पंढरपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की विठ्ठल-रुक्मिणी की शासकीय महापूजा
आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर महाराष्ट्र की आध्यात्मिक नगरी पंढरपुर एक बार फिर "विठ्ठल नाम" के जयघोष से गूंज उठी। लाखों वारकरी और श्रद्धालु महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से भगवान विठ्ठल और माता रुक्मिणी के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचे। इसी अवसर पर शनिवार तड़के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पत्नी अमृता फडणवीस के साथ श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पारंपरिक शासकीय महापूजा संपन्न की। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुई इस पूजा में राज्य की सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली, समय पर वर्षा और सभी नागरिकों के स्वास्थ्य एवं कल्याण की प्रार्थना की गई।

इस वर्ष धाराशिव जिले के कलंब तालुका के गोरेगांव निवासी बाबासाहेब माने (70) और उनकी पत्नी प्रभावती माने (68) को "मानाचे वारकरी" के रूप में शासकीय महापूजा में विशेष सम्मान दिया गया। माने दंपती पिछले दो दशकों से लगातार पंढरपुर वारी में शामिल हो रहे हैं और वारकरी परंपरा का निष्ठापूर्वक पालन करते आ रहे हैं। उनकी धार्मिक सेवा और समर्पण को देखते हुए उन्हें इस वर्ष पूजा का मान प्रदान किया गया। सम्मान मिलने के बाद माने दंपती ने इसे भगवान विठ्ठल की कृपा बताते हुए भावुक होकर अपनी खुशी व्यक्त की।

महापूजा के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों की सजावट से भव्य रूप दिया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंधन किया। सुरक्षा के लिए पुलिस बल, एसआरपीएफ, आपदा प्रबंधन दल और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात रहीं। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई, जबकि चंद्रभागा नदी घाट और मंदिर परिसर में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। महापूजा के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भगवान विठ्ठल की कृपा से महाराष्ट्र निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े, किसानों को अच्छी फसल मिले, राज्य में सुख-शांति बनी रहे और सभी नागरिकों का जीवन समृद्ध हो। उन्होंने वारकरी संप्रदाय की सेवा, समानता और भक्ति की परंपरा को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संतों की शिक्षाएं आज भी समाज को एकता और मानवता का संदेश देती हैं।

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की पालखियों के पंढरपुर पहुंचने के साथ ही वार्षिक वारी का समापन हुआ। लाखों श्रद्धालुओं ने चंद्रभागा नदी में पवित्र स्नान कर भगवान विठ्ठल के दर्शन किए। पूरे पंढरपुर में भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिससे पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और वारकरी आंदोलन की जीवंत पहचान के रूप में भी देखा जाता है।