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फार्मा उद्योग में निवेश का दौर धीमा, लेकिन इन क्षेत्रों में बनी हुई है उम्मीद

भारत के फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश गतिविधियों में हाल के समय में सुस्ती देखने को मिल रही है। दवा कंपनियों, हेल्थकेयर स्टार्टअप्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में होने वाली डील गतिविधियां धीमी हुई हैं, जिससे इस क्षेत्र में आने वाले निवेश की गति प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊंची ब्याज दरों, निवेशकों की सतर्क रणनीति और कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर बढ़ती सावधानी के कारण फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में विलय-अधिग्रहण (Mergers and Acquisitions) तथा प्राइवेट इक्विटी निवेश की रफ्तार कम हुई है।

Vindhya Dubey27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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फार्मा उद्योग में निवेश का दौर धीमा, लेकिन इन क्षेत्रों में बनी हुई है उम्मीद

फार्मा सेक्टर में निवेशकों का बदला रुख

पिछले कुछ वर्षों में भारत का फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य सेवाओं, दवा निर्माण, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ कंपनियों में निवेश तेजी से बढ़ा था। हालांकि अब निवेशक बड़ी संख्या में आक्रामक निवेश करने के बजाय कंपनियों की वास्तविक कमाई, बाजार क्षमता और लंबे समय तक टिकाऊ विकास की संभावनाओं का अधिक गहराई से मूल्यांकन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब केवल तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों के बजाय उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनके पास मजबूत बिजनेस मॉडल, स्थिर राजस्व और स्पष्ट लाभ कमाने की क्षमता है।

हेल्थकेयर स्टार्टअप्स पर भी पड़ा असर

भारत में हेल्थटेक और डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में निवेश आकर्षित किया था। ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फार्मेसी जैसे क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि काफी बढ़ी थी। लेकिन फंडिंग में कमी और निवेशकों की सख्त शर्तों के कारण कई स्टार्टअप्स को अपने खर्चों पर नियंत्रण करना पड़ा है। कुछ कंपनियों ने विस्तार योजनाओं को धीमा किया है, जबकि कई स्टार्टअप्स अब मुनाफे पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

डील वैल्यू और संख्या दोनों में गिरावट

हेल्थकेयर सेक्टर में डील गतिविधियों में कमी केवल निवेश राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि सौदों की संख्या में भी गिरावट देखी जा रही है। बड़ी फार्मा कंपनियां और निवेश फर्म अब बड़े अधिग्रहण करने से पहले अधिक सावधानी बरत रही हैं। विशेष रूप से बायोटेक, डिजिटल हेल्थ और स्पेशलिटी केयर जैसे क्षेत्रों में निवेशकों का रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क हुआ है।

किन क्षेत्रों में अभी भी बनी हुई है उम्मीद

हालांकि निवेश में गिरावट आई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है। इनमें शामिल हैं:

  • बायोसिमिलर्स और नई दवा खोज
  • कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग (CRDMO)
  • मेडिकल डिवाइस निर्माण
  • डायग्नोस्टिक सेवाएं
  • कैंसर और क्रॉनिक बीमारी से जुड़े उपचार
  • डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाएं

भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतें और सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली नीतियां लंबे समय में निवेश को फिर गति दे सकती हैं।

सरकार की नीतियों से सेक्टर को उम्मीद

भारत सरकार फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, मेडिकल डिवाइस निर्माण को बढ़ावा और घरेलू दवा उत्पादन को मजबूत करने की कोशिशों से उद्योग को समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में निवेश गतिविधियां दोबारा बढ़ सकती हैं, लेकिन इसके लिए वैश्विक बाजार में स्थिरता, बेहतर फंडिंग माहौल और कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार जरूरी होगा।

भारत के हेल्थकेयर सेक्टर का भविष्य

भले ही वर्तमान समय में डील गतिविधियों में सुस्ती दिखाई दे रही है, लेकिन भारत का फार्मा और हेल्थकेयर बाजार अभी भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, बुजुर्ग आबादी में वृद्धि, नई चिकित्सा तकनीकों का विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को लंबी अवधि में मजबूत बनाए रख सकती है। निवेशकों की रणनीति में बदलाव के बावजूद फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में नवाचार और गुणवत्ता आधारित कंपनियों के लिए अवसर बने हुए हैं।