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भारत में डिजिटल हेल्थ मिशन को मिली रफ्तार, टेलीमेडिसिन बना स्वास्थ्य सेवाओं का नया आधार

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार ने मरीजों के इलाज, डॉक्टरों से परामर्श और स्वास्थ्य रिकॉर्ड के प्रबंधन के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच का नया माध्यम बन रहा है।

Vindhya Dubey27 जुल. 2026, 01:23 PM IST
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भारत में डिजिटल हेल्थ मिशन को मिली रफ्तार, टेलीमेडिसिन बना स्वास्थ्य सेवाओं का नया आधार

कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता तेजी से सामने आई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) सहित कई पहलों के जरिए डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य मरीजों, अस्पतालों, डॉक्टरों, लैब और फार्मेसी को एक डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सकें।

टेलीमेडिसिन से दूरियां हुईं कम

टेलीमेडिसिन ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी बढ़ाया है। अब मरीज वीडियो कॉल, मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। इससे विशेष रूप से उन लोगों को लाभ मिल रहा है जो गांवों या ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेलीमेडिसिन से मरीजों का समय और यात्रा खर्च दोनों कम होते हैं। साथ ही छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अस्पतालों की ओपीडी पर भी दबाव घटता है, जिससे गंभीर मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल पाता है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को मिल रही गति

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत नागरिकों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) आईडी उपलब्ध कराई जा रही है। इस डिजिटल पहचान के जरिए मरीज अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को सुरक्षित तरीके से एक स्थान पर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या अस्पताल के साथ साझा कर सकते हैं। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से मरीजों की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट, दवाओं की जानकारी और उपचार का रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सकता है। इससे बार-बार जांच कराने की जरूरत कम होती है और इलाज की निरंतरता बनी रहती है।

सरकारी अस्पतालों में बढ़ रहा डिजिटल सिस्टम

देश के कई सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल ओपीडी, ई-प्रिस्क्रिप्शन, ऑनलाइन लैब रिपोर्ट और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे मरीजों को लंबी कतारों से राहत मिलने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ रही है। कई राज्यों में जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराई जा सके।

ग्रामीण भारत के लिए नई उम्मीद

भारत की बड़ी आबादी अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में टेलीमेडिसिन ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श मिल सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक का बढ़ता उपयोग

डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से कुछ बीमारियों की शुरुआती पहचान, मेडिकल इमेज का विश्लेषण, उपचार योजना तैयार करने और अस्पतालों के संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिल रही है। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं है, बल्कि यह चिकित्सकों को बेहतर और तेज निर्णय लेने में सहयोग देने वाला उपकरण है।

चुनौतियां अभी भी बरकरार

डिजिटल हेल्थ के विस्तार के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा, मरीजों के स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता और तकनीकी ढांचे को मजबूत करना अभी भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों को नई डिजिटल प्रणालियों के उपयोग का प्रशिक्षण देना और आम लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक बनाना भी आवश्यक है।

भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था होगी अधिक डिजिटल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन की भूमिका और अधिक बढ़ेगी। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड, रिमोट मॉनिटरिंग, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरण (Wearables), एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश में डिजिटल हेल्थ केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सुरक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता को समान गति से विकसित किया जाता है, तो आने वाले समय में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आधुनिक, समावेशी और मरीज-केंद्रित बन सकती है।