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सब्ज़ी बेची, ई-रिक्शा चलाया... अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पदक खाता बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने खोला। पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने देश को प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया। पोलियो, आर्थिक तंगी और संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद झंडू कुमार ने अपनी मेहनत, हिम्मत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उनकी सफलता आज लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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सब्ज़ी बेची, ई-रिक्शा चलाया... अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने रचा इतिहास
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दूसरे दिन भारत को पहली सफलता पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में मिली। बिहार के 28 वर्षीय झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर कुल 130.9 अंक हासिल किए। हालांकि 196 किलोग्राम वजन उठाने का उनका तीसरा और अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। इस स्पर्धा में नाइजीरिया के इदरीस रिलुवान ने स्वर्ण पदक और मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता, जबकि भारत के सुधीर छठे स्थान पर रहे।

झंडू कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में पोलियो की वजह से उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता सब्ज़ी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। ऐसे में झंडू ने भी छोटी उम्र से परिवार की मदद के लिए सब्ज़ी बेची और बाद में ई-रिक्शा चलाकर घर का खर्च उठाया। खेल के प्रति उनका जुनून इतना मजबूत था कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी तक बेच दी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अभ्यास जारी रखा।

पैरा पावरलिफ्टिंग में आने से पहले झंडू कुमार शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में जिला और राज्य स्तर पर कई पदक जीत चुके थे। वर्ष 2022 में कोच की सलाह पर उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग को अपनाया और कोलकाता में अपनी पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ही रजत पदक जीतकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2025 में उन्होंने 72 किलोग्राम वर्ग में 205 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और कुछ दिनों बाद खेलो इंडिया पैरा गेम्स में 206 किलोग्राम वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके अलावा वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड कप और एशिया-ओशिनिया ओपन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के साथ विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष छह खिलाड़ियों में जगह बनाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

भारत के लिए एक और पदक की उम्मीद पुरुषों के लाइटवेट वर्ग में अशोक मलिक से थी, लेकिन वह 143.8 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे और बेहद कम अंतर से पदक जीतने से चूक गए। इसके बावजूद प्रतियोगिता के शुरुआती दौर में झंडू कुमार की ऐतिहासिक सफलता ने भारतीय दल का उत्साह बढ़ा दिया है। उनका संघर्ष से सफलता तक का सफर यह साबित करता है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के दम पर किसी भी मुश्किल को हराया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।