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जमशेदपुर में दर्दनाक हादसा: डिमना लेक में डूबने से दो जूनियर डॉक्टरों की मौत l

झारखंड के जमशेदपुर में डिमना लेक पर तड़के हुए हादसे में दो जूनियर डॉक्टरों की डूबने से मौत हो गई। तीन डॉक्टर घूमने पहुंचे थे, जिनमें से एक का मोबाइल पानी में गिर गया। उसे निकालने के दौरान वह डूबने लगा, जिसे बचाने के लिए अन्य दो साथी भी कूद पड़े। इस दौरान एक डॉक्टर किसी तरह बाहर निकल आया, जबकि दो गहरे पानी में डूब गए। कई घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों के शव बरामद किए गए।

Kashish Rai27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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जमशेदपुर में दर्दनाक हादसा: डिमना लेक में डूबने से दो जूनियर डॉक्टरों की मौत l

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर में शुक्रवार तड़के एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला हादसा सामने आया, जिसमें दो जूनियर डॉक्टरों की जान चली गई। यह घटना डिमना लेक के पास हुई, जो शहर का एक लोकप्रिय लेकिन कुछ हिस्सों में खतरनाक जलाशय माना जाता है। इस हादसे ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे मेडिकल समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत तीन जूनियर डॉक्टर शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे डिमना लेक के पास टहलने और समय बिताने पहुंचे थे। वातावरण शांत था और इलाके में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी। इसी दौरान वे झील के स्लूइस गेट के पास पहुंच गए, जो आमतौर पर गहरे पानी और तेज बहाव के कारण संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।


बताया जा रहा है कि इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल फोन अचानक पानी में गिर गया। मोबाइल निकालने के उद्देश्य से एक डॉक्टर बिना ज्यादा सोच-विचार किए झील में उतर गया। शुरुआत में पानी उथला लग रहा था, लेकिन कुछ ही कदम आगे बढ़ते ही वह गहरे हिस्से में पहुंच गया और संतुलन खो बैठा। देखते ही देखते वह डूबने लगा और मदद के लिए पुकारने लगा। अपने साथी को डूबता देख बाकी दो डॉक्टर घबराकर तुरंत उसे बचाने के लिए पानी में कूद पड़े। हालांकि, उन्हें भी पानी की गहराई और परिस्थितियों का सही अंदाजा नहीं था। बचाव की कोशिश के दौरान हालात और बिगड़ गए और तीनों ही पानी में संघर्ष करने लगे।


एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा के अनुसार, काफी मशक्कत के बाद तीनों में से एक डॉक्टर किसी तरह तैरकर किनारे तक पहुंचने में सफल रहा। लेकिन बाकी दो डॉक्टर गहरे पानी में चले गए और लापता हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, सिविल डिफेंस टीम और प्रशिक्षित गोताखोर तुरंत मौके पर पहुंचे। बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया। अंधेरा, गहराई और पानी की स्थिति के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था। करीब चार घंटे से अधिक समय तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने दोनों डॉक्टरों के शव झील से बरामद किए।


पूर्वी सिंहभूम के डीएसपी दयानंद कुमार ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मृतकों की पहचान उनके परिजनों के आने और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी। इस हादसे के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शोक का माहौल है। साथी डॉक्टरों, स्टाफ और छात्रों के बीच गहरा दुख और स्तब्धता देखी जा रही है। कई लोगों ने इसे एक बेहद दुखद और टालने योग्य हादसा बताया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि डिमना लेक के कुछ हिस्से, खासकर स्लूइस गेट के आसपास, अत्यधिक गहरे और खतरनाक होते हैं, जहां बिना सुरक्षा उपायों के जाना जोखिम भरा हो सकता है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि जलाशयों के पास सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है, खासकर ऐसे स्थानों पर जहां गहराई का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो। यह हादसा एक छोटी सी लापरवाही के बड़े परिणाम को दर्शाता है और लोगों को सतर्क रहने का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।