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BSF जवान ने अपने ही साथियों पर की फायरिंग, दो की मौत l

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में BSF कैंप के अंदर एक जवान द्वारा की गई फायरिंग में दो जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपी जवान शिवम कुमार मिश्रा ने संतरी से राइफल छीनकर बैरकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। घटना के तुरंत बाद अन्य जवानों ने उसे काबू में लेकर हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में मानसिक तनाव की बात सामने आई है, वहीं आरोपी के खिलाफ पहले से कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही चल रही थी। फिलहाल पुलिस और BSF अधिकारी पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं, ताकि फायरिंग के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके।

Kashish Rai27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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BSF जवान ने अपने ही साथियों पर की फायरिंग, दो की मौत l

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के कैंप के भीतर हुई गोलीबारी की यह घटना न केवल बेहद गंभीर है, बल्कि सुरक्षा बलों के आंतरिक तंत्र और व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करती है। शुक्रवार को बैष्णबनगर क्षेत्र में 17 माइल के पास स्थित BSF की 119 बटालियन मुख्यालय में एक जवान द्वारा अपने ही साथियों पर की गई फायरिंग ने पूरे कैंप में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।


प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी जवान शिवम कुमार मिश्रा ने अचानक संतरी ड्यूटी पर तैनात एक जवान को काबू में कर उसकी सर्विस राइफल छीन ली। यह अपने आप में एक गंभीर सुरक्षा चूक मानी जा रही है, क्योंकि किसी भी संवेदनशील कैंप में हथियारों की सुरक्षा और नियंत्रण के कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। ऐसे में आरोपी का हथियार तक पहुंच जाना कई स्तरों पर जांच का विषय बन गया है। हथियार हासिल करने के बाद आरोपी जवान ने पास स्थित बैरकों की ओर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी इतनी अचानक और तेज थी कि साथी जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस दौरान हेड कॉन्स्टेबल अजय कुमार सिंह और कॉन्स्टेबल अंबादर सुरेश डारगु को गंभीर गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही या अस्पताल पहुंचने के दौरान मौत हो गई। वहीं हेड कॉन्स्टेबल विकास ब्रम्हा भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।


घटना के बाद कैंप में तत्काल आपात स्थिति घोषित कर दी गई। अन्य जवानों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए आरोपी को काबू में कर लिया और स्थिति को नियंत्रण में लाया। इस त्वरित कार्रवाई से और अधिक नुकसान होने से रोका जा सका। सूत्रों के अनुसार, आरोपी शिवम कुमार मिश्रा पहले से ही BSF की आंतरिक हिरासत में था और उसके खिलाफ कोर्ट-मार्शल की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह किस आरोप में जांच का सामना कर रहा था। यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि हिरासत में होने के बावजूद वह इस तरह की घटना को अंजाम देने में कैसे सफल हुआ।


प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि आरोपी जवान मानसिक तनाव से गुजर रहा था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसे घटना का अंतिम कारण मानने से इनकार किया है और कहा है कि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा मामला है या इसके पीछे कोई अन्य कारक भी हो सकता है घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और BSF के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर जांच शुरू कर दी है। कैंप के भीतर मौजूद अन्य जवानों से पूछताछ की जा रही है, साथ ही घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को इकट्ठा किया जा रहा है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ड्यूटी लॉग और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी बारीकी से जांच की जा रही है।


इस घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल के तनाव, अनुशासन और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्धसैनिक बलों में कार्यरत जवानों पर लगातार दबाव और तनाव रहता है, ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति पर नियमित निगरानी और सहायता प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है।  फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस घटना के पीछे की असली वजह क्या थी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह एक व्यक्तिगत आवेश में उठाया गया कदम था या इसके पीछे कोई गहरी और संगठित समस्या छिपी हुई है।