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वंदे मातरम् पर सख्ती: राज्यसभा में बिल पेश, बाधा डालने पर जेल l

राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया, जिसमें ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान है। लगातार व्यवधान के कारण इस बिल पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी और कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। प्रस्तावित कानून के तहत वंदे मातरम् के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माने की सजा हो सकती है। विपक्ष, खासकर वाम दल, इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

Kashish Rai27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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वंदे मातरम् पर सख्ती: राज्यसभा में बिल पेश, बाधा डालने पर जेल l

संसद के मॉनसून सत्र का पहला सप्ताह लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गया, जिसके कारण कोई ठोस विधायी कार्य नहीं हो सका। शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही भी विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के चलते बाधित रही। इसी बीच गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया, लेकिन हंगामे के कारण इस पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी।

सुबह 11 बजे जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हंगामे के बीच ही सदन में सूचीबद्ध कामकाज लेने की कोशिश की गई, लेकिन शोर-शराबा कम नहीं हुआ। इसके चलते कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।


जब दोबारा 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई, तब भी स्थिति जस की तस रही और विपक्ष का विरोध जारी रहा। बार-बार व्यवधान के चलते पीठासीन अधिकारी को कार्यवाही को फिर से दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। तीसरी बार कार्यवाही शुरू होने पर भी सदन में शांति बहाल नहीं हो सकी। इसी हंगामे के बीच सरकार ने वंदे मातरम् से जुड़ा यह महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश कर दिया। इसके बाद भी जब स्थिति नहीं सुधरी, तो उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही को 27 जुलाई, सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।


इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जो अभी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रीय ध्वज को प्राप्त है। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को दंडनीय अपराध माना जाता है, लेकिन अब सरकार वंदे मातरम् को भी इसी दायरे में शामिल करना चाहती है। अगर यह विधेयक संसद से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालना या उसका अपमान करना दंडनीय अपराध होगा। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।


सरकार का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए जरूरी है। वहीं, वामपंथी दलों सहित कुछ विपक्षी पार्टियां इस विधेयक का विरोध कर रही हैं। उनका मानना है कि इस तरह के प्रावधानों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है और इसे लेकर व्यापक चर्चा की जरूरत है। कुल मिलाकर, विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण न केवल इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी, बल्कि संसद का कीमती समय भी व्यर्थ चला गया। मॉनसून सत्र के पहले सप्ताह में विधायी कामकाज लगभग ठप रहा, जिससे आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।