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Clinical Trial Monitoring में लापरवाही पड़ी भारी, CDSCO ने कई एथिक्स कमेटियों का Registration किया कैंसल

भारत में क्लिनिकल ट्रायल और बायोमेडिकल रिसर्च की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी अलर्ट जारी किया है। CDSCO ने New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 (NDCTR 2019) के तहत कुछ Ethics Committees के Registration Certificates रद्द किए जाने की आधिकारिक सूचना जारी की है।

Vindhya Dubey27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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Clinical Trial Monitoring में लापरवाही पड़ी भारी, CDSCO ने कई एथिक्स कमेटियों का Registration किया कैंसल

यह कार्रवाई उन एथिक्स समितियों के खिलाफ की गई है जो क्लिनिकल ट्रायल और मानव प्रतिभागियों से जुड़े शोध की नैतिक निगरानी के लिए जिम्मेदार होती हैं। नियामक संस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में होने वाले क्लिनिकल ट्रायल अंतरराष्ट्रीय मानकों, वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और नैतिक दिशानिर्देशों के अनुरूप संचालित हों।

क्या है Ethics Committee और क्यों होती है इसकी जरूरत?

किसी भी नई दवा, वैक्सीन, चिकित्सा उपकरण या उपचार पद्धति को बाजार में लाने से पहले उसका क्लिनिकल ट्रायल किया जाता है। इन परीक्षणों में आम लोगों या मरीजों को शामिल किया जाता है, इसलिए उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र निगरानी संस्था की आवश्यकता होती है। इसी भूमिका को Ethics Committee या Institutional Ethics Committee (IEC) निभाती है।

Ethics Committee यह सुनिश्चित 

करती है कि:

• क्लिनिकल ट्रायल में शामिल लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे
• प्रतिभागियों से पूरी जानकारी देकर सहमति ली जाए
• शोध में शामिल जोखिमों और संभावित लाभों का सही मूल्यांकन किया जाए
• कमजोर वर्गों जैसे बच्चों, बुजुर्गों या गंभीर बीमारी वाले मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो
• शोध प्रक्रिया वैज्ञानिक और नैतिक मानकों के अनुसार हो

बिना Ethics Committee की मंजूरी के भारत में किसी भी क्लिनिकल ट्रायल को शुरू नहीं किया जा सकता।

New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 क्या हैं?

भारत सरकार ने क्लिनिकल ट्रायल प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 लागू किए थे। इन नियमों का उद्देश्य था:

• नई दवाओं के विकास की प्रक्रिया को बेहतर बनाना
• क्लिनिकल ट्रायल के दौरान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
• शोध में नैतिक मानकों का पालन करवाना
• दवा अनुमोदन प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देना
• भारत में क्लिनिकल रिसर्च को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना

NDCTR 2019 के तहत Ethics Committees के लिए CDSCO के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया। केवल पंजीकृत Ethics Committees ही क्लिनिकल ट्रायल से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा और निगरानी कर सकती हैं।

CDSCO ने क्यों उठाया यह कदम?

CDSCO द्वारा जारी Regulatory Alert में कुछ Ethics Committees के Registration Certificates रद्द किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि प्रत्येक मामले के विस्तृत कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन नियामकीय कार्रवाई आमतौर पर तब की जाती है जब कोई समिति निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करने में विफल रहती है।

संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:

1. नियामकीय नियमों का उल्लंघन

Ethics Committees को NDCTR 2019 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। इसमें समिति की संरचना, बैठक प्रक्रिया, दस्तावेजों का रखरखाव और निर्णय लेने की पारदर्शिता शामिल होती है। यदि कोई समिति इन नियमों का पालन नहीं करती है तो CDSCO कार्रवाई कर सकता है।

2. मानव प्रतिभागियों की सुरक्षा में कमी

क्लिनिकल ट्रायल में शामिल मरीजों या स्वयंसेवकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी Ethics Committee द्वारा:

• जोखिमों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया
• प्रतिभागियों की सहमति प्रक्रिया में कमी पाई गई
• सुरक्षा संबंधी रिपोर्टों की सही समीक्षा नहीं की गई

तो यह गंभीर नियामकीय उल्लंघन माना जा सकता है।

3. रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कमी

Ethics Committees को क्लिनिकल ट्रायल से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होते हैं। इनमें शामिल हैं:

• बैठक की कार्यवाही (Minutes of Meetings)
• ट्रायल प्रोटोकॉल की समीक्षा रिपोर्ट
• प्रतिभागियों की सहमति से जुड़े दस्तावेज
• सुरक्षा रिपोर्ट
• शोध से संबंधित निर्णयों का रिकॉर्ड

इन रिकॉर्ड में कमी पाए जाने पर भी कार्रवाई हो सकती है।

क्लिनिकल ट्रायल व्यवस्था पर इसका असर

CDSCO की इस कार्रवाई का उद्देश्य क्लिनिकल रिसर्च को रोकना नहीं बल्कि इसे अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। भारत में दवा कंपनियां, मेडिकल संस्थान और शोध संगठन बड़ी संख्या में क्लिनिकल ट्रायल करते हैं। ऐसे में मजबूत Ethics Committee व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि नई दवाओं और उपचारों का परीक्षण सुरक्षित तरीके से हो। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत नियामकीय निगरानी से:

• मरीजों का विश्वास बढ़ता है
• शोध की गुणवत्ता बेहतर होती है
• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की क्लिनिकल रिसर्च क्षमता मजबूत होती है
• अनैतिक शोध गतिविधियों पर रोक लगती है

CDSCO की भूमिका क्या है?

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) भारत की प्रमुख दवा नियामक संस्था है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। CDSCO की जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

• नई दवाओं की मंजूरी
• क्लिनिकल ट्रायल की निगरानी
• दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण
• मेडिकल डिवाइस का नियमन
• आयातित दवाओं की जांच
• सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना

भारत में क्लिनिकल रिसर्च का बढ़ता महत्व

भारत दुनिया के बड़े फार्मास्युटिकल बाजारों में से एक है और यहां दवा अनुसंधान तेजी से बढ़ रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन निर्माण क्षमता और स्वास्थ्य अनुसंधान की भूमिका वैश्विक स्तर पर सामने आई। इसके बाद सरकार ने क्लिनिकल रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल निगरानी और नियामकीय सुधारों पर अधिक ध्यान दिया है।

नई दवाओं, कैंसर उपचार, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और वैक्सीन अनुसंधान के लिए सुरक्षित और पारदर्शी क्लिनिकल ट्रायल व्यवस्था बेहद जरूरी है।


CDSCO द्वारा Ethics Committees के Registration Certificates रद्द करना क्लिनिकल ट्रायल व्यवस्था में जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 के तहत यह कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि भारत में मानव प्रतिभागियों की सुरक्षा, नैतिक शोध प्रक्रिया और नियामकीय अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। दवा अनुसंधान के बढ़ते क्षेत्र में मजबूत Ethics Committees और सख्त निगरानी व्यवस्था न केवल मरीजों के अधिकारों की रक्षा करेगी बल्कि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में और मजबूत बनाएगी।