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स्कूलों के पाठ्यक्रम में हो हिंदू देवी-देवताओं की जानकारी: मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी जानकारी शामिल की जानी चाहिए। उनका कहना है कि आज के बच्चे धर्म और संस्कृति से जुड़े कई सवाल पूछते हैं, जिनका जवाब कई बार अभिभावकों के पास नहीं होता। उन्होंने परिवारों में बढ़ती मोबाइल संस्कृति पर चिंता जताते हुए संवाद, संस्कार और भारतीय परंपराओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 01:24 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित 'युगानुकूल मातृत्व' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही भारतीय संस्कृति और हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बुनियादी जानकारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार यदि ऐसी जानकारी स्कूल की पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा होगी तो बच्चों के मन में उठने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक प्रश्नों का सही उत्तर उन्हें आसानी से मिल सकेगा। मोहन भागवत ने कहा कि आज की पीढ़ी केवल आदेश मानने वाली नहीं है, बल्कि हर बात को समझना चाहती है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और उनके सवालों का धैर्यपूर्वक उत्तर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कार केवल उपदेश से नहीं, बल्कि परिवार के व्यवहार और वातावरण से विकसित होते हैं।
उन्होंने परिवारों में बढ़ते मोबाइल फोन के उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि आज अधिकांश लोग घर लौटने के बाद भी अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच संवाद कम होता जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ अधिक समय बिताने और अपने आचरण से उन्हें संस्कार देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान भागवत ने महिलाओं की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परिवार की सारी जिम्मेदारियां उन्हीं पर डाल दी जाएं। परिवार को एक टीम की तरह मिलकर काम करना चाहिए और सभी सदस्यों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।
हालांकि, स्कूलों के पाठ्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं की जानकारी शामिल करने को लेकर केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय या एनसीईआरटी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का एक सार्वजनिक सुझाव है, जिस पर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा हो सकती है।
