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बिजली संकट को मात दे रहा मणिपुर का हेल्थ सेंटर, 4 साल से Solar Power से चल रहा CHC
मणिपुर के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre-CHC) ने सीमित संसाधनों, बिजली आपूर्ति की अनिश्चितता और भौगोलिक चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने का एक प्रभावी मॉडल पेश किया है। यह स्वास्थ्य केंद्र पिछले चार वर्षों से सौर ऊर्जा (Solar Power) के माध्यम से संचालित हो रहा है। पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्र में स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र ने दिखाया है कि वैकल्पिक ऊर्जा समाधान किस तरह ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं।

जहां कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की कमी के कारण मरीजों की जांच, दवा भंडारण और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं, वहीं इस CHC ने सौर ऊर्जा को अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता बनाए रखी है।
बिजली की समस्या के बीच सौर ऊर्जा बनी जीवनरेखा
स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली केवल रोशनी के लिए जरूरी नहीं होती, बल्कि कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं बिजली पर निर्भर रहती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जहां बिजली कटौती आम समस्या होती है, वहां अस्पताल संचालन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में बिजली की जरूरत होती है:
मणिपुर के इस CHC में सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित होने के बाद बिजली की उपलब्धता को लेकर निर्भरता कम हुई है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों की देखभाल में अधिक सुविधा मिली।
पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी चुनौती
मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण रही हैं। राज्य के कई क्षेत्र पहाड़ी, दुर्गम और सीमित परिवहन सुविधाओं वाले हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
इन परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्र का सुचारू संचालन बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
Solar Power ने कैसे बदली स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति?
सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था ने स्वास्थ्य केंद्र को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। सौर पैनल से मिलने वाली ऊर्जा का उपयोग अस्पताल की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे मिलने वाले प्रमुख लाभ:
1. आपातकालीन सेवाओं में सुधार
अस्पतालों में रात के समय मरीजों की देखभाल के लिए लगातार बिजली जरूरी होती है। बिजली कटौती की स्थिति में भी सौर ऊर्जा ने आपात सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने में मदद की।
2. वैक्सीन और दवाओं की सुरक्षा
कई वैक्सीन और दवाओं को एक निश्चित तापमान पर रखना आवश्यक होता है। बिजली बाधित होने पर इनके खराब होने का खतरा रहता है। स्थायी ऊर्जा स्रोत होने से कोल्ड चेन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिलती है।
3. डिजिटल हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा
आज स्वास्थ्य सेवाओं में ऑनलाइन रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन और डिजिटल रिपोर्टिंग का महत्व बढ़ गया है। बिजली की स्थिर उपलब्धता डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में मदद करती है।
4. स्वास्थ्य कर्मचारियों को सुविधा
डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी बेहतर रोशनी और उपकरणों की उपलब्धता के साथ मरीजों की देखभाल अधिक प्रभावी तरीके से कर सकते हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में Renewable Energy की बढ़ती जरूरत
भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अब Renewable Energy यानी नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, PHC और CHC जैसे स्वास्थ्य संस्थानों में सौर ऊर्जा अपनाने से:
विशेष रूप से ऐसे क्षेत्र जहां बिजली ग्रिड की पहुंच कमजोर है, वहां सौर ऊर्जा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण समाधान साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य ढांचे की अन्य चुनौतियां अभी भी मौजूद
हालांकि सौर ऊर्जा ने इस स्वास्थ्य केंद्र की एक बड़ी समस्या का समाधान किया है, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करने के लिए कई अन्य क्षेत्रों में भी सुधार की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार केवल बिजली की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी हैं:
सरकार की ग्रामीण स्वास्थ्य पर प्राथमिकता
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और डिजिटल हेल्थ पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में सौर ऊर्जा जैसे स्थानीय समाधान स्वास्थ्य संस्थानों को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मणिपुर CHC मॉडल से मिल सकता है अन्य राज्यों को सबक
मणिपुर के इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का अनुभव यह दिखाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों का समाधान केवल बड़े अस्पताल बनाने से नहीं बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान अपनाने से भी किया जा सकता है। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में यदि स्वास्थ्य केंद्रों को सौर ऊर्जा, बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
मणिपुर का यह सौर ऊर्जा से संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। चार वर्षों से Solar Power के सहारे सेवाएं जारी रखना यह दिखाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी समस्याओं का समाधान बन सकती है। हालांकि, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ऊर्जा समाधान के साथ-साथ डॉक्टरों की उपलब्धता, चिकित्सा उपकरणों और बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश जरूरी है। यह मॉडल देश के अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है, जहां बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों बड़ी चुनौती हैं।
