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गलत पैर की सर्जरी का आरोप: क्या यह केवल मानवीय भूल है या अस्पतालों में बढ़ती लापरवाही का संकेत?

हरियाणा के नूंह स्थित शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज में 4 वर्षीय बच्चे के कथित गलत पैर के ऑपरेशन का मामला केवल एक चिकित्सा त्रुटि नहीं, बल्कि अस्पतालों में मरीज सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह घटना डॉक्टरों और चिकित्सा टीम की जिम्मेदारी, अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और सरकारी नियमों के अनुपालन में संभावित कमी की ओर इशारा कर सकती है।

Vindhya Dubey27 जुल. 2026, 01:24 PM IST
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गलत पैर की सर्जरी का आरोप: क्या यह केवल मानवीय भूल है या अस्पतालों में बढ़ती लापरवाही का संकेत?

हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी डॉक्टर या कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन यह मामला यह जरूर दिखाता है कि सर्जरी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में छोटी सी चूक भी मरीज के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है।

सर्जरी से पहले डॉक्टरों के लिए क्या हैं अनिवार्य नियम?

भारत में सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑपरेशन से पहले कई सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और अंतरराष्ट्रीय मरीज सुरक्षा मानकों के तहत निम्न प्रक्रियाएं शामिल हैं:

  • मरीज की पहचान की कम से कम दो स्तरों पर पुष्टि।
  • ऑपरेशन किए जाने वाले अंग या हिस्से की स्पष्ट मार्किंग।
  • मरीज की फाइल, जांच रिपोर्ट और सर्जरी की आवश्यकता का मिलान।
  • ऑपरेशन थिएटर में पूरी टीम द्वारा "टाइम-आउट" प्रक्रिया, जिसमें अंतिम बार पुष्टि की जाती है कि सही मरीज, सही प्रक्रिया और सही अंग पर सर्जरी हो रही है।
  • सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट का पालन।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की Surgical Safety Checklist और भारत में अपनाए गए मरीज सुरक्षा मानकों का उद्देश्य गलत अंग पर सर्जरी जैसी घटनाओं को रोकना है।

यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो किसकी जिम्मेदारी?

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ऑपरेशन की जिम्मेदारी केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं होती। सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ, ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन और अस्पताल प्रशासन – सभी की सामूहिक जिम्मेदारी होती है कि हर प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार पूरी हो। यदि जांच में यह सामने आता है कि सर्जिकल साइट मार्किंग नहीं की गई, रिकॉर्ड की ठीक से जांच नहीं हुई या टीम ने अंतिम पुष्टि नहीं की, तो यह व्यक्तिगत चूक के साथ-साथ संस्थागत विफलता का मामला भी बन सकता है।

सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही का सवाल

देश में पिछले कुछ वर्षों में मरीज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार, मानकीकृत उपचार प्रक्रियाओं और नियमित ऑडिट पर जोर देता रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक और अस्पताल मान्यता प्रणालियों के तहत मरीज सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसके बावजूद यदि गलत अंग पर सर्जरी जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या अस्पतालों में इन नियमों का वास्तविक पालन हो रहा है या वे केवल दस्तावेजों तक सीमित हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हर ऑपरेशन से पहले चेकलिस्ट आधारित प्रणाली और डिजिटल रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाने से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। कई विकसित देशों में सर्जरी से पहले मरीज और परिवार की अंतिम पुष्टि भी प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

निष्पक्ष जांच जरूरी

इस मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार करना महत्वपूर्ण है। यदि चिकित्सीय लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि किसी प्रक्रिया में खामी पाई जाती है, तो पूरे सिस्टम में सुधार की आवश्यकता होगी। यह घटना केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि मरीज सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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