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कोकण से पश्चिम महाराष्ट्र का सफर अब सिर्फ एक घंटे में, 9,600 करोड़ के जयगढ़-सतारा एक्सप्रेसवे की प्रक्रिया शुरू
कोकण के तटीय क्षेत्र और पश्चिम महाराष्ट्र के बीच यात्रा के समय को ऐतिहासिक रूप से घटाने के लिए केंद्र सरकार और एनएचएआई ने 98 किलोमीटर लंबे जयगढ़-चिपलूण-सतारा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का खाका तैयार किया है, जिसके लिए डीपीआर और फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
Kalpana Gautam27 जुल. 2026, 04:36 PM IST

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने महाराष्ट्र में कोकण के महत्वपूर्ण जयगढ़ बंदरगाह को पश्चिम महाराष्ट्र के सतारा जिले से जोड़ने वाले 98 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस बहुउद्देश्यीय परियोजना के पूरा होने के बाद जयगढ़ से सतारा के बीच 5 घंटे की यात्रा घटकर महज 1 घंटा रह जाएगी।
पश्चिम घाट के कठिन इलाकों और घुमावदार घाटों के कारण वर्तमान में मालवाहक वाहनों और यात्रियों को बेहद धीमी और जोखिम भरी आवाजाही का सामना करना पड़ता है। जयगढ़ बंदरगाह से कोयला, बॉक्साइट, लोह अयस्क और एलएनजी का परिवहन सीधे पुणे, सतारा, सांगली और कोल्हापुर जैसे औद्योगिक केंद्रों तक सुचारू रूप से करने के लिए यह एक्सप्रेसवे एक गेम-चेंजर साबित होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और कोकण तथा सह्याद्री क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
9,600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर तैयार होगा। एनएचएआई की योजना के अनुसार, शुरुआती चरण में इसे चार-लेन का बनाया जाएगा, जिसमें बाद में आठ-लेन तक विस्तार करने का प्रावधान रखा जाएगा।
पश्चिमी घाट के संवेदनशील और पहाड़ी क्षेत्र को पार करने के लिए इस मार्ग पर अत्याधुनिक सुरंगें (Tunnels) और एलिवेटेड वायाडक्ट (Viaducts) बनाए जाएंगे, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सीधी कनेक्टिविटी दी जा सके।
यह एक्सप्रेसवे आगे चलकर प्रस्तावित पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे और एनएच-48 (पुराना एनएच-4) से सीधा जुड़ेगा। इससे पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, चाकण और सांगली-कोल्हापुर के उद्योगपतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार हेतु जयगढ़ बंदरगाह तक सीधा और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो जाएगा। चिपलूण को इस मार्ग पर एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किए जाने की संभावना है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, जयगढ़ बंदरगाह एक बारमासी गहरा बंदरगाह है, जहाँ से भारी मात्रा में औद्योगिक कच्चा माल देश के अंदरूनी हिस्सों में भेजा जाता है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से भारी व्यावसायिक वाहनों को संकरे शहर मार्गों और खतरनाक घाटों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एनएचएआई के वरिष्ठ सूत्रों ने स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया के बाद चयनित सलाहकार एजेंसी एक्सप्रेसवे की भौगोलिक संरचना, पर्यावरण-सामाजिक प्रभाव, आवश्यक सुरंगों की डिजाइन, भूमि अधिग्रहण की लागत और वित्तीय व्यवहार्यता का सटीक आकलन प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद मुख्य निर्माण कार्य को मंजूरी दी जाएगी।
