education
MPSC ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में 12 लाख के पेपर लीक का दावा, रोहित पवार ने उठाए गंभीर सवाल
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र 12 लाख रुपये में बेचा गया और परीक्षा से पहले व्हाट्सएप के जरिए कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। हालांकि, एमपीएससी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है।
Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 04:41 PM IST

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ उम्मीदवारों तक पहुंचा दिया गया था। उनके अनुसार, कथित तौर पर एक प्रश्नपत्र के लिए 12 लाख रुपये की डील तय की गई थी, जिसमें 5 लाख रुपये एडवांस और शेष 7 लाख रुपये चयन के बाद देने की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से दो दिन पहले व्हाट्सएप के जरिए प्रश्न भेजे गए थे और उम्मीदवारों को कुछ सवाल जानबूझकर गलत हल करने की सलाह भी दी गई थी, ताकि किसी को संदेह न हो।
रोहित पवार ने दावा किया कि उनके पास व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जो कथित पेपर लीक की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने बार्शी कनेक्शन का भी जिक्र किया और कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नंदुरबार के एक नायब तहसीलदार के बेटे और बेटी को लगभग समान अंक और रैंक मिलने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो इससे हजारों मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि निर्धारित कट-ऑफ से कम अंक पाने वाले एक उम्मीदवार को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसा किस आधार पर किया गया और इसके पीछे किसका प्रभाव या दबाव था। रोहित पवार ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में इस तरह की अनियमितताएं होती हैं, तो इससे युवाओं का सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास कमजोर होगा।
हालांकि, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा सुरक्षित, गोपनीय और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आयोजित की गई थी तथा पेपर लीक होने का दावा तथ्यहीन है। आयोग का कहना है कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे आरोपों की अभी तक किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है। पेपर 12 लाख रुपये में बिकने का दावा केवल विधायक रोहित पवार द्वारा लगाया गया आरोप है, जिसकी अभी तक किसी सरकारी जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह महाराष्ट्र की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक साबित हो सकता है, वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो एमपीएससी की पारदर्शिता पर उठे सवाल भी खत्म हो जाएंगे।
