culture
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: सह्याद्री की गोद में स्थित भगवान शिव का दिव्य धाम, जानिए इतिहास, पौराणिक कथा और अद्भुत वास्तुकला
महाराष्ट्र के पुणे जिले के खेड तालुका में सह्याद्री पर्वतमाला के बीच स्थित श्री भीमाशंकर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। घने जंगल, मनमोहक प्राकृतिक वातावरण, प्राचीन इतिहास और गहरी धार्मिक आस्था के कारण यह मंदिर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 04:48 PM IST

महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भीमाशंकर समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर सह्याद्री पर्वतमाला के घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी बेहद आकर्षक है। मंदिर के आसपास फैला भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है, जहां महाराष्ट्र का राज्य पशु 'शेकरू' (इंडियन जायंट स्क्विरल) भी पाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार भीमाशंकर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार राक्षस भीम, जो कुंभकर्ण का पुत्र था, अत्यंत शक्तिशाली हो गया और उसने देवताओं, ऋषियों तथा पृथ्वी के लोगों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उसकी क्रूरता से परेशान होकर सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने प्रकट होकर भीमासुर का वध किया और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मान्यता है कि युद्ध के बाद भगवान शिव के शरीर से निकले पसीने की धारा से भीमा नदी का उद्गम हुआ। इसी स्थान पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और यह स्थान 'भीमाशंकर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का मूल निर्माण लगभग 12वीं–13वीं शताब्दी में हुआ था। बाद में मराठा शासनकाल में इसका विस्तार और जीर्णोद्धार कराया गया। माना जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस मंदिर के दर्शन किए थे। इसके अलावा मराठा साम्राज्य के प्रसिद्ध राजनेता नाना फडणवीस ने मंदिर के सभा मंडप और अन्य हिस्सों के निर्माण व संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मंदिर की वास्तुकला नागर और हेमाड़पंथी शैली का सुंदर मिश्रण है। काले पत्थरों से निर्मित यह मंदिर अपनी भव्य नक्काशी, सुंदर शिल्पकला और मजबूत पत्थर के स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का शिखर और गर्भगृह प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जिस पर प्रतिदिन जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर परिसर में नंदी महाराज की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है। श्रद्धालु पहले नंदी के दर्शन करते हैं और उसके बाद भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का दर्शन करते हैं। मंदिर परिसर में माता पार्वती और भगवान गणेश के मंदिर भी स्थित हैं। महाशिवरात्रि यहां का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु देशभर से भीमाशंकर पहुंचते हैं। इसके अलावा श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार, कार्तिक मास और अन्य प्रमुख हिंदू पर्वों पर भी यहां विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भीमाशंकर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है। यहां से भीमा नदी का उद्गम, गुप्त भीमाशंकर, नागफणी व्यू पॉइंट, हनुमान तालाब, सीताराम बाबा आश्रम और भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य जैसे कई दर्शनीय स्थल देखे जा सकते हैं। वर्षा ऋतु में पूरा क्षेत्र हरियाली और बादलों से ढक जाता है, जिससे यहां की प्राकृतिक सुंदरता और भी मनमोहक हो जाती है।भीमाशंकर पुणे से लगभग 110 किलोमीटर और मुंबई से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। पुणे, मुंबई और नासिक से नियमित बस सेवाएं और निजी वाहन उपलब्ध हैं।
यदि आप भगवान शिव की दिव्य आराधना के साथ-साथ सह्याद्री की प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन इतिहास और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह ऐसा पवित्र स्थान है, जहां हर श्रद्धालु और पर्यटक को जीवन में कम से कम एक बार अवश्य जाना चाहिए।
