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श्रद्धा के साथ हरित क्रांति: शिरडी में अब साईं प्रसाद के रूप में मिलेगा पवित्र नीम का पौधा
साईं बाबा की पावन नगरी शिरडी से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को गुरुस्थान के पवित्र नीम वृक्ष का प्रतीकात्मक पौधा "साईं प्रसाद" के रूप में देने का निर्णय लिया है। पहले चरण में लगभग एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें श्रद्धालुओं को प्रतीकात्मक शुल्क पर उपलब्ध कराया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य साईं बाबा की शिक्षाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देशभर में हरित अभियान को नई दिशा देना है।
Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 04:49 PM IST

शिरडी : श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट ने श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हुए एक नई पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत शिरडी आने वाले श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक प्रसाद के साथ गुरुस्थान के पवित्र नीम वृक्ष का प्रतीकात्मक पौधा भी "साईं प्रसाद" के रूप में दिया जाएगा। गुरुस्थान का नीम वृक्ष साईं बाबा के जीवन से जुड़ा अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। मान्यता है कि साईं बाबा ने अपने प्रारंभिक दिनों में इसी नीम वृक्ष के नीचे साधना की थी। इसी आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने इस वृक्ष के पौधों को श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
योजना के पहले चरण में लगभग एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 15 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रत्येक पौधा श्रद्धालुओं को लगभग 20 रुपये के प्रतीकात्मक मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकें। श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडिलकर ने कहा कि साईं बाबा और नीम वृक्ष का संबंध श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे वितरित करना नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु को पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रसाद के रूप में घर ले जाए गए पौधे आने वाले वर्षों में पर्यावरण और मानव समाज दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे।
संस्थान का मानना है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु शिरडी आते हैं। यदि इनमें से प्रत्येक श्रद्धालु अपने घर या आसपास एक पौधा लगाए और उसका संरक्षण करे, तो यह अभियान देशभर में हरित क्रांति का मजबूत आधार बन सकता है। यह पहल धार्मिक आस्था को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का एक प्रेरणादायी प्रयास मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, नीम का वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह वायु को शुद्ध करने, जैव विविधता बढ़ाने, तापमान नियंत्रित रखने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में साईं प्रसाद के रूप में दिया जाने वाला यह पौधा श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी देगा।
योजना के पहले चरण में लगभग एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 15 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रत्येक पौधा श्रद्धालुओं को लगभग 20 रुपये के प्रतीकात्मक मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकें। श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडिलकर ने कहा कि साईं बाबा और नीम वृक्ष का संबंध श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे वितरित करना नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु को पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रसाद के रूप में घर ले जाए गए पौधे आने वाले वर्षों में पर्यावरण और मानव समाज दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे।
संस्थान का मानना है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु शिरडी आते हैं। यदि इनमें से प्रत्येक श्रद्धालु अपने घर या आसपास एक पौधा लगाए और उसका संरक्षण करे, तो यह अभियान देशभर में हरित क्रांति का मजबूत आधार बन सकता है। यह पहल धार्मिक आस्था को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का एक प्रेरणादायी प्रयास मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, नीम का वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह वायु को शुद्ध करने, जैव विविधता बढ़ाने, तापमान नियंत्रित रखने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में साईं प्रसाद के रूप में दिया जाने वाला यह पौधा श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी देगा।
