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कलसुबाई शिखर: सह्याद्री की सबसे ऊंची चोटी, जानिए इसका इतिहास, पौराणिक कथा, ट्रैकिंग और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अकोले तालुका में स्थित कलसुबाई शिखर समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और इसे महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है। सह्याद्री पर्वतमाला का यह प्रसिद्ध शिखर ट्रैकिंग प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। शिखर पर स्थित मां कलसुबाई के मंदिर के कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
Priyanka Gaikwad27 जुल. 2026, 06:50 PM IST

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अकोले तालुका के बारी (Bari) गांव के पास स्थित कलसुबाई शिखर सह्याद्री पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है। लगभग 1,646 मीटर की ऊंचाई के कारण इसे "महाराष्ट्र का एवरेस्ट" भी कहा जाता है। हर वर्ष हजारों ट्रैकर और पर्यटक इस शिखर पर चढ़ाई करने के लिए यहां पहुंचते हैं। 'कलसुबाई' नाम के पीछे एक लोकप्रिय लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि 'कलसू' नाम की एक युवती गांव में रहती थी। उसके साथ हुए अन्याय के बाद वह इस पर्वत पर आकर रहने लगी। बाद में लोगों ने उसे देवी का स्वरूप मानकर पूजा शुरू कर दी। आज शिखर पर स्थित मां कलसुबाई का मंदिर उसी आस्था का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
कलसुबाई शिखर तक पहुंचने का सबसे लोकप्रिय मार्ग बारी गांव से शुरू होता है। यह ट्रैक मध्यम कठिनाई वाला माना जाता है। रास्ते में लोहे की सीढ़ियां, पत्थरों से बने रास्ते और खड़ी चढ़ाई ट्रैकिंग को रोमांचक बनाते हैं। सामान्यतः शिखर तक पहुंचने में 3 से 4 घंटे का समय लगता है। शिखर से भंडारदरा बांध, आर्थर झील, रतनगढ़ किला, हरिश्चंद्रगढ़, अलंग, मदन, कुलंग किले तथा सह्याद्री पर्वतमाला का अद्भुत विहंगम दृश्य दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य बेहद मनमोहक होता है और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
कलसुबाई क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है। वर्षा ऋतु में यहां चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे जंगली फूल, झरने और बादलों से घिरी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। वहीं सर्दियों में ठंडा मौसम और साफ आसमान ट्रैकिंग का आनंद कई गुना बढ़ा देते हैं। शिखर पर स्थित मां कलसुबाई के छोटे लेकिन अत्यंत पूजनीय मंदिर में श्रद्धालु नारियल, फूल और चुनरी अर्पित कर पूजा करते हैं। नवरात्रि, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन किया जाता है। ट्रैकिंग के लिए आने वाले पर्यटकों को मजबूत ट्रैकिंग जूते, पीने का पानी, हल्का भोजन, वर्षा ऋतु में रेनकोट, टॉर्च और प्राथमिक उपचार सामग्री साथ रखने की सलाह दी जाती है। बारिश के मौसम में चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं, इसलिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें और कचरा पर्वत पर न छोड़ें।
कलसुबाई के आसपास भंडारदरा बांध, रंधा जलप्रपात, रतनगढ़ किला, हरिश्चंद्रगढ़, अलंग-मदन-कुलंग किले और प्रसिद्ध संधन वैली जैसे दर्शनीय स्थल भी स्थित हैं। इसलिए यहां दो से तीन दिनों की साहसिक और प्राकृतिक पर्यटन यात्रा की योजना आसानी से बनाई जा सकती है। कलसुबाई शिखर तक पहुंचने के लिए मुंबई, पुणे, नासिक या अहमदनगर से इगतपुरी या घोटी होते हुए बारी गांव पहुंचा जा सकता है। यहां से ट्रैकिंग की शुरुआत होती है। राज्य परिवहन बसों और निजी वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध है।
यदि आप रोमांचक ट्रैकिंग, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सह्याद्री पर्वतमाला के अद्भुत नजारों का एक साथ अनुभव करना चाहते हैं, तो कलसुबाई शिखर महाराष्ट्र के सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों में से एक है। यह ऐसी जगह है, जहां हर प्रकृति प्रेमी, ट्रैकर और पर्यटक को जीवन में कम से कम एक बार अवश्य जाना चाहिए।
