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जम्मू-कश्मीर में 20 दिन बाद खुले स्कूल, बारिश से क्षतिग्रस्त भवनों को मरम्मत तक बंद रखने का आदेश

जम्मू-कश्मीर में करीब 20 दिनों तक स्कूल बंद रहने के बाद 27 जुलाई 2026 से दोबारा कक्षाएं शुरू हो गईं। हालांकि, हाल की भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त या असुरक्षित स्कूल भवनों को मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के इस फैसले का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब चुनौती क्षतिग्रस्त स्कूलों की जल्द मरम्मत करने, सुरक्षित भवनों में पढ़ाई बहाल करने और लंबे समय तक स्कूल बंद रहने से हुई पढ़ाई की भरपाई करने की है।

Anshuman Mishra29 जुल. 2026, 02:07 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में 20 दिन बाद खुले स्कूल, बारिश से क्षतिग्रस्त भवनों को मरम्मत तक बंद रखने का आदेश


श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर में करीब 20 दिनों तक बंद रहने के बाद 27 जुलाई 2026 से स्कूलों में दोबारा पढ़ाई शुरू हो गई। हालांकि, हाल की भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित स्कूल भवनों को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जिन स्कूलों की इमारतें बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई हैं या जिन्हें छात्रों और कर्मचारियों के लिए असुरक्षित माना गया है, उन्हें मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।


20 दिन बाद स्कूलों में लौटी पढ़ाई

खराब मौसम और भारी बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाई गई थीं। पहले स्कूलों को 6 जुलाई से 19 जुलाई तक बंद रखने का फैसला किया गया था, लेकिन लगातार बारिश और कई इलाकों में बनी प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए छुट्टियां 26 जुलाई तक बढ़ा दी गईं। इसके बाद 27 जुलाई से स्कूलों को फिर से खोल दिया गया। स्कूलों के दोबारा खुलने से छात्रों की नियमित पढ़ाई शुरू हो गई है। लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के कारण पढ़ाई का नुकसान हुआ है, ऐसे में अब शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की जाएगी।


क्षतिग्रस्त भवनों में कक्षाएं नहीं होंगी

स्कूल खुलने के बावजूद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त या असुरक्षित स्कूल भवनों में छात्रों को नहीं बुलाया जाएगा। ऐसे भवनों को मरम्मत पूरी होने तक बंद रखा जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल स्कूल खुलने की तारीख तय होने के आधार पर बच्चों को जोखिम वाले भवनों में न भेजा जाए। जिन इमारतों की छत, दीवार, बिजली व्यवस्था या अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, उनकी स्थिति की जांच के बाद ही उन्हें दोबारा इस्तेमाल में लाया जाना चाहिए।


भारी बारिश और भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें

जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में हाल की भारी बारिश के कारण बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं सामने आईं। पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा भी बना रहा। ऐसे में स्कूलों को बंद रखने का फैसला केवल भवनों की सुरक्षा से जुड़ा नहीं था, बल्कि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षित आवाजाही भी इसका महत्वपूर्ण कारण थी। बारिश के बाद अब प्रशासन के सामने क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने की चुनौती है। इसमें स्कूल भवनों के साथ-साथ सड़क, पुल, बिजली और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत भी शामिल है।


बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण

स्कूलों को दोबारा खोलने से पहले भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। प्राकृतिक आपदा के बाद कमजोर हुई इमारतों में छात्रों को भेजना दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसलिए प्रशासन का क्षतिग्रस्त स्कूलों को मरम्मत तक बंद रखने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। स्कूल भवनों की तकनीकी जांच और संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। इसके बाद ही यह तय किया जाना चाहिए कि कोई भवन छात्रों के लिए सुरक्षित है या उसमें अतिरिक्त मरम्मत की जरूरत है।


करीब 20 दिनों तक स्कूल बंद रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इससे पाठ्यक्रम पूरा करने, परीक्षाओं की तैयारी और नियमित सीखने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर उन छात्रों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है जो पहले से ही पढ़ाई में पीछे चल रहे हैं।

अब स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों और शिक्षा विभाग को पढ़ाई की गति बनाए रखने के साथ-साथ छूटी हुई पढ़ाई को पूरा करने की योजना बनानी होगी। हालांकि, अतिरिक्त कक्षाओं या संशोधित शैक्षणिक कार्यक्रम की जरूरत स्थानीय परिस्थितियों और शिक्षा विभाग के फैसलों पर निर्भर करेगी।


प्राकृतिक आपदाओं के लिए स्कूलों को तैयार करने की जरूरत

जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में स्कूलों की सुरक्षा को केवल सामान्य परिस्थितियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के लिए आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना जरूरी है। इसमें भवनों की नियमित सुरक्षा जांच, सुरक्षित निकासी मार्ग, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था और मौसम संबंधी चेतावनी मिलने पर त्वरित निर्णय लेने की व्यवस्था शामिल हो सकती है। संवेदनशील क्षेत्रों में स्कूलों की संरचनात्मक मजबूती पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।


बारिश से क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों को मरम्मत तक बंद रखना छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। इससे संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है और प्रशासन को भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने का समय मिलेगा। इसके अलावा, यह व्यवस्था यह पहचानने में भी मदद कर सकती है कि किन स्कूलों को मामूली मरम्मत की जरूरत है और किन भवनों में बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण या संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं।


अब प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि प्रभावित स्कूलों की तकनीकी जांच और मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया जाए। साथ ही, स्कूलों को दोबारा खोलने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि भवन छात्रों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। भविष्य में मौसम की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों के लिए स्थानीय स्तर पर पूर्व चेतावनी और आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना भी जरूरी होगा। इससे भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति में स्कूलों को बंद करने और फिर से खोलने के फैसले समय पर और अधिक प्रभावी तरीके से लिए जा सकेंगे। कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में 20 दिनों के बाद स्कूलों का दोबारा खुलना शिक्षा व्यवस्था के सामान्य होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

लेकिन बारिश से क्षतिग्रस्त और असुरक्षित भवनों को बंद रखने का फैसला यह भी दिखाता है कि सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों की बहाली के साथ छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। अब चुनौती यह है कि प्रभावित स्कूलों की मरम्मत जल्द पूरी की जाए, भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और छात्रों की छूटी हुई पढ़ाई को भी व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया जाए।