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अंकित शर्मा हत्याकांड में फांसी या उम्रकैद? ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों की सजा पर निर्णायक मोड़, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से मांगी मौत की सजा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित अंकित शर्मा हत्याकांड में अब सजा को लेकर कानूनी लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच गई है। पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों के लिए दिल्ली पुलिस ने अदालत से फांसी की सजा की मांग की है, जबकि बचाव पक्ष ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला मानने से इनकार करते हुए मृत्युदंड का विरोध किया है। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

Sonali29 जुल. 2026, 02:08 PM IST
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अंकित शर्मा हत्याकांड में फांसी या उम्रकैद? ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों की सजा पर निर्णायक मोड़, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से मांगी मौत की सजा

साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में सजा तय करने की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। कड़कड़डूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस हत्याकांड को "कोल्ड ब्लडेड मर्डर" और "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी का अपराध बताते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला मृत्युदंड की श्रेणी में नहीं आता।


क्या कहा दिल्ली पुलिस ने?

दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत में कहा कि अंकित शर्मा का पहले अपहरण किया गया, फिर उन्हें बेहद बेरहमी से पीटा गया और हत्या के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया। अभियोजन के अनुसार पोस्टमार्टम में अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटें मिली थीं, जिनमें 18 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। अभियोजन ने अदालत से कहा कि दोषियों ने इंसानियत की सारी सीमाएं पार कर दीं और उनके प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

पुलिस ने यह भी दलील दी कि इस हत्या को अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए, जिनमें कुल 53 लोगों की जान गई थी। अभियोजन का कहना था कि अपराध की प्रकृति और उसकी क्रूरता समाज में गलत संदेश रोकने के लिए कठोरतम दंड की मांग करती है।


बचाव पक्ष ने क्या कहा?

ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मृत्युदंड की मांग का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में फांसी की सजा केवल "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" मामलों में ही दी जाती है। बचाव पक्ष का तर्क था कि पूरे मुकदमे के दौरान अभियोजन आपराधिक साजिश का आरोप सिद्ध नहीं कर सका। उन्होंने यह भी कहा कि दंगों के दौरान पुलिस स्वयं हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने में असफल रही थी, इसलिए किसी एक व्यक्ति को पूरी घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

बचाव पक्ष की अधिवक्ता तारा नरूला ने अदालत को बताया कि ताहिर हुसैन अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं तथा उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। अदालत से व्यक्तिगत परिस्थितियों पर भी विचार करने का आग्रह किया गया।


13 जुलाई को आया था दोषसिद्धि का फैसला

इस मामले में 13 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को हत्या, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, वैमनस्य फैलाने और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था। हालांकि अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के आरोप से बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में माना था कि अभियोजन पक्ष ने हत्या और अन्य आरोपों को संदेह से परे साबित किया है।


क्या है पूरा मामला?

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। 26 वर्षीय आईबी अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को लापता हो गए थे और अगले दिन उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। इस मामले की जांच के बाद ताहिर हुसैन सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया गया था।


सजा पर फैसला सुरक्षित

27 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब दोषियों को मिलने वाली सजा पर अलग आदेश सुनाएगी। इसलिए अभी यह कहना गलत होगा कि किसी दोषी को फांसी या अन्य सजा सुनाई जा चुकी है।