government
गरीबों का घर या अमीरों को मौका? पीएम आवास योजना पर हाईकोर्ट का बड़ा सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत सिडको द्वारा बनाए गए आवासों की पात्रता शर्तों पर मुंबई हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनी योजना का लाभ आखिर उच्च आय वर्ग के लोगों को कैसे मिल सकता है? फिलहाल कोर्ट ने घरों के आवंटन पर लगी रोक बरकरार रखते हुए पूरी योजना की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
Priyanka Gaikwad29 जुल. 2026, 02:08 PM IST

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-Urban) का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग के पात्र नागरिकों को किफायती दरों पर पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें लाखों परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर काम कर रही हैं। हालांकि, नवी मुंबई में सिडको द्वारा लागू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अब कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। मुंबई हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिडको द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों में कई ऐसी खामियां हैं, जिनके कारण वास्तविक गरीब और जरूरतमंद लोगों की बजाय अधिक आय वाले और आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी योजना का लाभ लेने की स्थिति में आ सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि योजना में वार्षिक आय की अधिकतम सीमा को प्रभावी और स्पष्ट तरीके से लागू नहीं किया गया है, जिससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास नवी मुंबई में कोई घर नहीं है, तो वह देश के किसी अन्य शहर या राज्य में संपत्ति होने के बावजूद इस योजना के लिए पात्र माना जा सकता है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह शर्त गरीबों के लिए बनाई गई योजना की भावना के विपरीत है और इससे वास्तविक जरूरतमंदों के हिस्से के घर आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को मिलने की आशंका बढ़ जाती है। मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सिडको से पूछा कि आखिर गरीबों और निम्न आय वर्ग के लिए बनाई गई योजना का लाभ ऐसे लोगों को कैसे दिया जा सकता है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि लाभार्थियों के चयन के लिए किन मानकों का पालन किया गया और पात्रता तय करने के पीछे क्या नीति अपनाई गई।
हाईकोर्ट ने फिलहाल आवासों के आवंटन पर लगी अंतरिम रोक को जारी रखते हुए सिडको को योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, चयन मानदंड और नीति से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही मामले में आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस मामले का सीधा असर उन हजारों आवेदकों पर पड़ सकता है, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के लिए आवेदन किया है। फिलहाल सभी आवेदकों की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि उसी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवासों का आवंटन कब और किन शर्तों के आधार पर किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल सिडको की आवास योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी आवास योजनाओं में पारदर्शिता, पात्रता की स्पष्ट व्यवस्था, लाभार्थियों के निष्पक्ष चयन और वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यदि अदालत इस मामले में कोई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी करती है, तो भविष्य में अन्य सरकारी आवास योजनाओं के नियमों और पात्रता मानकों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
