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शिमला में बारिश का कहर: मॉल रोड के पास भूस्खलन, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के प्रतिष्ठित मॉल रोड के समीप भूस्खलन की घटना सामने आई। पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर गिरने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को घेरकर लोगों की आवाजाही सीमित कर दी। राहत एवं बचाव दल मौके पर तैनात हैं और मलबा हटाने का कार्य जारी है। भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है तथा लोगों और पर्यटकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

Neha Sharma29 जुल. 2026, 02:09 PM IST
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शिमला में बारिश का कहर: मॉल रोड के पास भूस्खलन, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

शिमला: हिमाचल प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसून ने एक बार फिर जनजीवन को प्रभावित किया है। राजधानी शिमला के प्रतिष्ठित मॉल रोड के समीप सोमवार को भारी बारिश के बीच भूस्खलन की घटना सामने आई। लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक खिसक गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र को घेराबंदी कर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी और राहत एवं बचाव दलों को मौके पर तैनात कर दिया। राज्य में 28 जुलाई से 1 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिसके चलते भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा लगातार बना हुआ है। 


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह से हो रही लगातार बारिश के कारण पहाड़ी से मिट्टी, चट्टानें और छोटे-बड़े पत्थर अचानक नीचे आने लगे। घटना के समय क्षेत्र में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही थी, लेकिन समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को संवेदनशील घोषित कर दिया है। मॉल रोड शिमला का सबसे प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक केंद्र माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में भूस्खलन की घटना ने स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ पर्यटकों की चिंता भी बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से प्रभावित क्षेत्र के आसपास अनावश्यक रूप से एकत्र न होने की अपील की है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भू-वैज्ञानिकों की टीम भी इलाके का निरीक्षण कर रही है ताकि पहाड़ी के अन्य हिस्सों में दरार या अतिरिक्त खतरे का आकलन किया जा सके।


घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पहाड़ी पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित हिस्से में लोगों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी। यदि लगातार बारिश जारी रहती है तो सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों, जिनमें शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और सिरमौर शामिल हैं, में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने तथा सड़कों के बाधित होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। लोगों को पहाड़ी ढलानों, नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की गई है।


हिमाचल प्रदेश इस वर्ष मानसून के दौरान लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन, बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाओं ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई सड़कें बंद हैं, बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। राज्य सरकार के अनुसार अब तक मानसून से राज्य को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है तथा कई लोगों की जान भी जा चुकी है। सरकार ने पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।


प्रशासन ने कहा है कि मौसम में सुधार होने तक संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी की जाएगी। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना के आधार पर ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं का जोखिम और बढ़ सकता है।