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अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस: सरकारी जमीन बचाने के लिए केरल सरकार का सख्त अभियान
केरल सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान तेज करने का ऐलान किया है। राजस्व मंत्री ए. पी. अनिल कुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, लंबे समय से निर्धारित मानदंडों के तहत सरकारी भूमि पर रह रहे पात्र परिवारों को भूमि का वैध स्वामित्व (पट्टा) देने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना और वास्तविक हकदारों को अधिकार दिलाना है।

तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री ए. पी. अनिल कुमार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपना रही है और जहां भी अवैध अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां कानून के अनुसार बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भूमि प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना भी है। इसके तहत राजस्व विभाग सरकारी जमीनों की पहचान, सीमांकन और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को भी तेज कर रहा है ताकि भविष्य में अवैध कब्जों को रोका जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लंबे समय से सरकारी भूमि पर रह रहे ऐसे परिवार, जो निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, उन्हें बेदखल नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भूमि का स्वामित्व प्रमाणपत्र (पट्टा) उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के साथ-साथ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को स्थायी अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केरल में 1,600 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पहचान की गई है। इनमें सबसे अधिक अतिक्रमण इडुक्की जिले में पाया गया है, जबकि तिरुवनंतपुरम, वायनाड, एर्नाकुलम और कोझिकोड भी प्रभावित जिलों में शामिल हैं। इन इलाकों में सर्वे, सीमांकन और चरणबद्ध तरीके से बेदखली की कार्रवाई जारी है। हाल ही में वागामोन क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण के मामले में राजस्व विभाग ने मौके का निरीक्षण कर अस्थायी निर्माण हटाया और भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित करते हुए बोर्ड भी लगाया। मंत्री ने कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति या संस्था हो, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी।
सरकार राज्य की भूमि संबंधी नीतियों में व्यापक सुधार की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की तैयारी है, जो दशकों पुराने भूमि कानूनों की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान जरूरतों के अनुरूप संशोधित करने की सिफारिश करेगी। सरकार इसे "भूमि सुधार का दूसरा चरण" मान रही है, जिससे भूमि प्रबंधन अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जा सके। राजस्व विभाग ने सभी जिला प्रशासन, तहसीलदारों और गांव स्तर के अधिकारियों को सरकारी भूमि की नियमित निगरानी, नए अतिक्रमण की तत्काल पहचान और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इस अभियान से सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के साथ-साथ भूमि संबंधी विवादों में भी कमी आएगी और पात्र नागरिकों को उनके अधिकार समय पर मिल सकेंगे।
