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MACT का अहम फैसला: पिलियन राइडर की मौत पर बीमा कंपनी नहीं बच सकती जिम्मेदारी से, परिवार को ₹23.61 लाख का मुआवजा
सड़क हादसे में 22 वर्षीय बेटे को खोने वाले परिवार को आखिरकार छह साल बाद न्याय मिल गया। ठाणे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि हादसा बाइक चालक की लापरवाही से हुआ था और मृतक केवल पीछे बैठा (पिलियन राइडर) था। अदालत ने बीमा कंपनी और वाहन मालिक को संयुक्त रूप से ₹23.61 लाख मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का आदेश देते हुए कहा कि तकनीकी दलीलों के आधार पर पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।

सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 22 वर्षीय युवक के परिवार को करीब छह साल बाद न्याय मिला है। महाराष्ट्र के ठाणे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने मृतक के परिजनों को ₹23.61 लाख का मुआवजा देने का आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दुर्घटना पूरी तरह दोपहिया वाहन चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग का परिणाम थी। न्यायाधिकरण ने यह भी माना कि मृतक केवल बाइक पर पीछे बैठा (पिलियन राइडर) था और दुर्घटना में उसकी कोई लापरवाही नहीं थी। इसलिए बीमा कंपनी और वाहन मालिक दोनों संयुक्त एवं पृथक रूप से (Jointly and Severally) मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार होंगे।
27 जुलाई 2026 को ठाणे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के सदस्य आर. वी. मोहिते ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम पिटीशन (MACP) संख्या 665/2020 में यह फैसला सुनाया। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी और वाहन मालिक को आदेश दिया कि वे एक माह के भीतर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित ₹23,61,100 की मुआवजा राशि जमा करें।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, 7 जनवरी 2020 की शाम लगभग 5 बजे कुनाल रविंद्र भोइर अपने परिचित की एक्टिवा मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे हुए यात्रा कर रहे थे। रास्ते में बाइक चालक ने तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर फिसल गया। दुर्घटना में कुनाल के सिर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 12 जनवरी 2020 को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद गणेशपुरी पुलिस ने बाइक चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337, 338, 304ए तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत मामला दर्ज किया। जांच के बाद चालक के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई, जिससे प्रथम दृष्टया चालक की लापरवाही की पुष्टि हुई।
बीमा कंपनी की दलीलें क्यों नहीं मानी गईं?
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना के समय मृतक स्वयं बाइक चला रहा था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। कंपनी ने एफआईआर दर्ज होने में देरी का मुद्दा भी उठाया। हालांकि, न्यायाधिकरण ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस चार्जशीट, गवाहों के बयान और ड्राइविंग लाइसेंस की जांच के बाद पाया कि बीमा कंपनी अपने दावों को साबित नहीं कर सकी। अदालत ने माना कि चालक के पास वैध लाइसेंस था और दुर्घटना के समय मृतक केवल पीछे बैठा हुआ था। इसलिए बीमा कंपनी का योगदानात्मक लापरवाही (Contributory Negligence) का तर्क स्वीकार नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के आधार पर तय हुआ मुआवजा
मुआवजे की गणना करते समय न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के Sarla Verma बनाम Delhi Transport Corporation तथा National Insurance Company बनाम Pranay Sethi मामलों में निर्धारित सिद्धांतों का पालन किया। आय का प्रत्यक्ष दस्तावेजी प्रमाण नहीं होने के कारण मृतक की अनुमानित मासिक आय ₹13,000 मानी गई। भविष्य की आय (Future Prospects), आश्रितों की संख्या, मल्टीप्लायर, अंतिम संस्कार खर्च, लॉस ऑफ एस्टेट और पारिवारिक क्षतिपूर्ति (Consortium) को जोड़ते हुए कुल ₹23.61 लाख का मुआवजा निर्धारित किया गया।
किसे कितना मुआवजा मिलेगा?
न्यायाधिकरण ने आदेश दिया कि कुल मुआवजा राशि में से मृतक की मां को ₹10.61 लाख, पिता को ₹8 लाख और बहन को ₹5 लाख दिए जाएं। साथ ही माता-पिता के हिस्से की राशि में से ₹2.50-₹2.50 लाख दो वर्ष के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) में रखने का भी निर्देश दिया गया, ताकि परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फैसले का कानूनी महत्व
यह निर्णय मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड से यह साबित हो जाए कि मृतक केवल पिलियन राइडर था और दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई, तो बीमा कंपनी केवल तकनीकी दलीलों के आधार पर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। साथ ही अदालत ने यह भी दोहराया कि मुआवजे की गणना सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानकों के अनुरूप ही की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को उचित और न्यायसंगत राहत मिल सके।
मामले का विवरण
मामला: Motor Accident Claim Petition No. 665 of 2020
अदालत: मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), ठाणे
न्यायाधीश: आर. वी. मोहिते (सदस्य, MACT)
आदेश की तारीख: 27 जुलाई 2026
मुआवजा: ₹23,61,100
ब्याज: 9% प्रतिवर्ष
