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हर आंदोलन में बाबा साहेब की तस्वीर क्यों? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

देशभर में किसानों, छात्रों, श्रमिकों और सामाजिक न्याय से जुड़े आंदोलनों में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें और संविधान की प्रतियां लगातार दिखाई देती हैं। संविधान, समानता, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके विचार आज भी लाखों लोगों के संघर्ष का आधार माने जाते हैं। यही वजह है कि हर बड़े जनआंदोलन में बाबा साहेब की विचारधारा मार्गदर्शक के रूप में नजर आती है।

Priyanka Gaikwad29 जुल. 2026, 02:09 PM IST
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हर आंदोलन में बाबा साहेब की तस्वीर क्यों? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह
नई दिल्ली: भारत में जब भी किसी सामाजिक, शैक्षणिक, किसान या श्रमिक आंदोलन की बात होती है, तब डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें, संविधान की प्रतियां और "जय भीम" के नारे आम तौर पर देखने को मिलते हैं। हाल के विभिन्न आंदोलनों ने एक बार फिर इस बात को चर्चा में ला दिया है कि आखिर हर संघर्ष में बाबा साहेब के विचारों का इतना प्रभाव क्यों दिखाई देता है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर केवल भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा, महिलाओं के अधिकार, श्रमिक कल्याण और किसानों के हितों के भी मजबूत समर्थक थे।

उनका मानना था कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अधिकारों की लड़ाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए। इतिहास बताता है कि बाबा साहेब ने दलित समाज के अधिकारों के साथ-साथ किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के मुद्दों को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। इसी कारण आज विभिन्न वर्गों के लोग उन्हें अपने संघर्ष का प्रेरणास्रोत मानते हैं। चाहे किसानों का आंदोलन हो, छात्रों का प्रदर्शन हो या सामाजिक न्याय की मांग, हर जगह संविधान और बाबा साहेब के विचारों का उल्लेख प्रमुखता से किया जाता है। संविधान सभा में 25 नवंबर 1949 को दिए गए अपने ऐतिहासिक भाषण में डॉ. आंबेडकर ने स्पष्ट कहा था कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए संवैधानिक तरीकों का पालन करना जरूरी है। यही संदेश आज भी कई आंदोलनों की पहचान बन चुका है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी आंदोलन में बाबा साहेब की तस्वीर का इस्तेमाल होने का अर्थ यह नहीं है कि वह आंदोलन पूरी तरह उनके विचारों पर आधारित है। अलग-अलग संगठन उनके सिद्धांतों की अपनी-अपनी व्याख्या करते हैं, लेकिन सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को लेकर उनका योगदान निर्विवाद माना जाता है। इसी वजह से आज भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक बने हुए हैं।