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फर्जी रजिस्ट्री और भूमि विवाद रोकने के लिए कर्नाटक सरकार का बड़ा कदम

कर्नाटक सरकार भूमि पंजीकरण प्रणाली में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत केवल बिक्री दस्तावेजों का पंजीकरण करने के बजाय जमीन के वास्तविक स्वामित्व का सत्यापन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य फर्जी रजिस्ट्री, भूमि धोखाधड़ी और संपत्ति विवादों पर रोक लगाना है। इसके लिए पंजीकरण विभाग, राजस्व रिकॉर्ड और डिजिटल मैपिंग को एकीकृत करने की योजना बनाई जा रही है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद सुधारों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Neha Sharma29 जुल. 2026, 02:09 PM IST
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फर्जी रजिस्ट्री और भूमि विवाद रोकने के लिए कर्नाटक सरकार का बड़ा कदम

कर्नाटक सरकार राज्य की भूमि पंजीकरण व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना है ताकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली संपत्ति की खरीद-बिक्री, धोखाधड़ी और वर्षों तक चलने वाले भूमि विवादों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इसके लिए सरकार ने वर्तमान दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली की जगह स्वामित्व सत्यापन (Ownership Validation) आधारित मॉडल लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है।


मौजूदा व्यवस्था में उप-पंजीयक कार्यालय (Sub-Registrar Office) मुख्य रूप से बिक्री विलेख (Sale Deed) और अन्य दस्तावेजों का पंजीकरण करते हैं। दस्तावेजों का पंजीकरण होने के बाद भी जमीन के वास्तविक स्वामित्व को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। नई व्यवस्था में केवल दस्तावेजों की औपचारिक जांच नहीं होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संपत्ति बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उसका वैध मालिक है और उस पर किसी प्रकार का कानूनी विवाद या प्रतिबंध नहीं है। इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाले लेन-देन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।


प्रस्तावित सुधार के तहत स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, भूमि अभिलेख (Land Records) और डिजिटल भू-मानचित्रण (Digital Mapping) प्रणाली को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी संपत्ति की जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और पंजीकरण से पहले उसके स्वामित्व का स्वतः सत्यापन किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस एकीकृत प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम होगी। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग तथा सर्वे एवं सेटलमेंट विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इन रिपोर्टों के आधार पर सरकार तय करेगी कि नई प्रणाली को किस प्रकार लागू किया जाए और इसके लिए किन कानूनी एवं प्रशासनिक बदलावों की आवश्यकता होगी।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल लागू होता है तो कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां भूमि पंजीकरण व्यवस्था केवल दस्तावेजों के पंजीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि भी करेगी। इससे संपत्ति खरीदने वाले लोगों का भरोसा बढ़ेगा, भूमि विवादों में कमी आएगी और न्यायालयों पर भी ऐसे मामलों का बोझ घट सकता है। साथ ही, रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास मजबूत होने और कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सरकार का कहना है कि इस सुधार का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव करना नहीं है, बल्कि भूमि प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और विवाद-मुक्त हो सकती है।