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राजस्थान में शहरी विकास की रफ्तार धीमी, जमीन विवादों से अटकी AMRUT 2.0 योजनाएं
राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी AMRUT 2.0 योजना के तहत लगभग ₹11,560 करोड़ की शहरी विकास परियोजनाएं भूमि विवादों और आवश्यक मंजूरियों में देरी के कारण प्रभावित हो रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, हरित क्षेत्र और बुनियादी शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। केंद्र सरकार ने बताया कि प्रशासनिक अड़चनों के चलते कई परियोजनाओं की प्रगति धीमी पड़ गई है और राज्य सरकार से भूमि संबंधी विवादों का जल्द समाधान करने तथा आवश्यक अनुमतियां समय पर जारी करने का आग्रह किया गया है।

राजस्थान में शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) 2.0 की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भूमि विवादों और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी के कारण प्रभावित हो रही हैं। केंद्र सरकार के अनुसार राज्य में लगभग ₹11,560 करोड़ की परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही है, जिससे पेयजल, सीवरेज और अन्य शहरी सुविधाओं के विस्तार पर असर पड़ रहा है।
AMRUT 2.0 योजना का उद्देश्य देश के शहरों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना, आधुनिक सीवरेज नेटवर्क विकसित करना, जल निकायों का संरक्षण करना और हरित क्षेत्रों का विस्तार करना है। राजस्थान के अनेक शहरों में इस योजना के तहत नई जलापूर्ति योजनाएं, सीवर लाइन, पार्कों का विकास तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं। हालांकि, कई परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों, स्वामित्व संबंधी समस्याओं और विभिन्न विभागों से समय पर मंजूरी नहीं मिलने के कारण अटकी हुई हैं।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन प्रशासनिक बाधाओं के कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही है। संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकार से भूमि संबंधी विवादों का शीघ्र समाधान करने तथा लंबित स्वीकृतियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है, ताकि परियोजनाओं का लाभ समय पर नागरिकों तक पहुंच सके। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास परियोजनाओं में भूमि उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यदि भूमि अधिग्रहण, सीमांकन और स्वामित्व संबंधी विवाद समय रहते हल नहीं किए जाते, तो परियोजनाओं की लागत बढ़ने के साथ-साथ उनके पूरा होने में भी काफी देरी होती है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।
AMRUT 2.0 के तहत राजस्थान में पहले से ही अनेक जलापूर्ति, सीवरेज, जल निकाय पुनर्जीवन और हरित क्षेत्र विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। केंद्र सरकार का कहना है कि यदि भूमि विवादों और लंबित अनुमतियों का समयबद्ध समाधान कर लिया जाता है, तो परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकती है। इससे शहरों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी, सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
