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संघर्ष से सिल्वर तक: इलेक्ट्रीशियन की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने बढ़ाया भारत का मान

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली और एक इलेक्ट्रीशियन की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन किया। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

Vindhya Dubey29 जुल. 2026, 02:09 PM IST
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संघर्ष से सिल्वर तक: इलेक्ट्रीशियन की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने बढ़ाया भारत का मान
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की युवा वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। लेकिन इस पदक के पीछे केवल खेल का प्रदर्शन नहीं, बल्कि वर्षों का संघर्ष, आर्थिक चुनौतियां और परिवार का त्याग छिपा है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी एक इलेक्ट्रीशियन की बेटी हैं और उनकी सफलता आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

संघर्ष से शुरू हुआ सफर
ज्ञानेश्वरी के पिता बिजली का काम करते हैं। युवावस्था में उनका भी खेलों में आगे बढ़ने का सपना था, लेकिन आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें अपना सपना छोड़ना पड़ा। उन्होंने वही सपना अपनी बेटी के माध्यम से पूरा करने का संकल्प लिया। सीमित आय के बावजूद परिवार ने ज्ञानेश्वरी की ट्रेनिंग, पोषण और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके भाई ने भी अपने खेल करियर से समझौता कर बहन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ज्ञानेश्वरी यादव ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 199 किलोग्राम का भार उठाया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडीह ने जीता, जबकि कांस्य पदक कनाडा की रेबेका ग्रूलक्स को मिला। ज्ञानेश्वरी का यह पदक भारत के वेटलिफ्टिंग दल के शानदार प्रदर्शन का हिस्सा बना।

पहले भी कर चुकी हैं देश का नाम रोशन
यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश्वरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित किया हो। इससे पहले वह जूनियर विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीत चुकी हैं। लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह भारतीय वेटलिफ्टिंग की उभरती हुई बड़ी खिलाड़ी हैं।

यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?
ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता केवल एक पदक की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा आर्थिक परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को यदि सही प्रशिक्षण, संसाधन और परिवार का समर्थन मिले तो वे विश्व स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

यह उपलब्धि विशेष रूप से उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। साथ ही यह सरकार और खेल संस्थाओं के लिए भी संदेश है कि जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता देना भविष्य में भारत के लिए और अधिक पदक ला सकता है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह पदक?
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा भारत के मजबूत खेलों में से एक रही है। ज्ञानेश्वरी यादव का रजत पदक इस परंपरा को आगे बढ़ाता है और यह साबित करता है कि देश में नई पीढ़ी के खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई और टीम का मनोबल बढ़ा।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
ज्ञानेश्वरी यादव की कहानी बताती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और परिवार के विश्वास से हासिल होती है। एक इलेक्ट्रीशियन की बेटी का कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच तक पहुंचना भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य की तस्वीर पेश करता है। उनकी उपलब्धि आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देगी।