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सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया हाई जंप का पहला रजत

भारतीय हाई जंप खिलाड़ी सर्वेश कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हाई जंप स्पर्धा में 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुष हाई जंप में भारत का पहला रजत पदक है। सर्वेश की इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई और भविष्य में ओलंपिक व विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

Vindhya Dubey29 जुल. 2026, 02:09 PM IST
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सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया हाई जंप का पहला रजत
भारत: भारत के स्टार हाई जंप खिलाड़ी सर्वेश अनिल कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में सर्वेश ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुष हाई जंप स्पर्धा में किसी भारतीय खिलाड़ी का पहला रजत पदक है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2022 में तेजस्विन शंकर के कांस्य पदक के रूप में था।

कैसा रहा मुकाबला?
फाइनल मुकाबले में सर्वेश कुशारे ने शुरुआती ऊंचाइयों को आसानी से पार किया और 2.20 मीटर तक एक भी गलती नहीं की। 2.25 मीटर की ऊंचाई पर उन्हें शुरुआती दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए यह ऊंचाई पार कर ली। इसके बाद 2.28 मीटर पर उनके तीनों प्रयास असफल रहे।

जमैका के रोमेन बेकफोर्ड भी 2.28 मीटर पार नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने 2.25 मीटर पहले प्रयास में पार किया था। इसी काउंटबैक नियम के आधार पर उन्हें स्वर्ण पदक मिला, जबकि सर्वेश को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इंग्लैंड के जैक किमानी ने 2.20 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं सर्वेश
कॉमनवेल्थ गेम्स से ठीक पहले सर्वेश कुशारे ने इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 2.31 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। वह 2.30 मीटर की बाधा पार करने वाले पहले भारतीय हाई जंपर भी बने। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है और एशियाई तथा विश्व स्तर पर भारत की पहचान मजबूत की है।

कौन हैं सर्वेश कुशारे?
महाराष्ट्र के नासिक जिले से आने वाले सर्वेश कुशारे का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने गांव में अभ्यास शुरू किया और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। इससे पहले वह एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके हैं, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जंपर बने और पेरिस ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

सर्वेश का यह रजत पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। लंबे समय तक भारत की पहचान मुख्य रूप से भाला फेंक, कुश्ती, मुक्केबाजी और वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों तक सीमित रही, लेकिन अब हाई जंप जैसे तकनीकी ट्रैक एवं फील्ड इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ी लगातार विश्व स्तर पर चुनौती पेश कर रहे हैं।

यह पदक इस बात का संकेत है कि भारत में एथलेटिक्स का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है और खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और बेहतर सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। आने वाले एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों के लिए भी यह प्रदर्शन सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

हाई जंप एथलेटिक्स की एक तकनीकी स्पर्धा है, जिसमें खिलाड़ी बिना बार गिराए अधिकतम ऊंचाई पार करने का प्रयास करता है। प्रत्येक ऊंचाई पर तीन अवसर मिलते हैं। यदि खिलाड़ी तीनों प्रयासों में असफल रहता है तो वह प्रतियोगिता से बाहर हो जाता है। विजेता का फैसला सबसे अधिक ऊंचाई और आवश्यकता पड़ने पर काउंटबैक नियम के आधार पर किया जाता है। इसी नियम के कारण इस बार समान ऊंचाई पार करने के बावजूद स्वर्ण और रजत पदक का फैसला हुआ।

सर्वेश कुशारे का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। यदि वह अपनी मौजूदा लय बरकरार रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी भारत के लिए पदक की उम्मीद मजबूत हो सकती है। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों को यह संदेश देती है कि लगातार मेहनत, धैर्य और सही प्रशिक्षण से विश्व स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।