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मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: ईरान बोला- अमेरिका की मदद करने वाले देश भी होंगे निशाने पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ब्रिटेन को लेकर भी विवाद तेज हो गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर ब्रिटेन अमेरिका के साथ मिलकर उसके खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई, खुफिया सहयोग या अन्य रणनीतिक समर्थन में शामिल होता है, तो उसे संघर्ष का हिस्सा माना जाएगा और वह "वैध लक्ष्य" बन सकता है।

तेहरान/लंदन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ब्रिटेन भी निशाने पर आ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर ब्रिटेन अमेरिका के साथ मिलकर उसके खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो वह ब्रिटेन को "वैध लक्ष्य" मान सकता है। ईरान की इस धमकी के बाद मध्य पूर्व में जारी तनाव और गहरा गया है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी देश द्वारा अमेरिका को सैन्य, खुफिया या लॉजिस्टिक समर्थन देना उसे संघर्ष का हिस्सा बना सकता है। हालांकि ब्रिटेन ने अभी तक ईरान के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।
ईरान की चेतावनी से बढ़ी पश्चिमी देशों की चिंता
ईरान की ओर से आई इस चेतावनी को पश्चिमी देशों के लिए गंभीर संदेश माना जा रहा है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका के सहयोगी देश उसके खिलाफ कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो उन्हें भी जवाबी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ किसी भी कदम का जवाब देने में सक्षम है। ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि अमेरिका क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली नीतियां अपना रहा है।
ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों पर भी नजर
ब्रिटेन और अमेरिका लंबे समय से करीबी रणनीतिक सहयोगी रहे हैं। दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ काम करते हैं।
हालांकि ईरान के साथ मौजूदा तनाव में ब्रिटेन की भूमिका को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ब्रिटेन ने अब तक क्षेत्रीय स्थिरता, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिटेन सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो इससे संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है और यूरोप भी इस संकट में अधिक शामिल हो सकता है।
अमेरिका-ईरान विवाद की वजह
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई मुद्दों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, मध्य पूर्व में उसका प्रभाव और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां प्रमुख हैं। हाल के घटनाक्रमों में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाने और फिर कुछ समय के लिए हमलों को रोकने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है, जबकि अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा सुरक्षा खतरा
ईरान की चेतावनी के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्रिटेन सहित अन्य पश्चिमी देशों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। किसी भी बड़े सैन्य टकराव से तेल आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जताई चिंता
कई देशों ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते खुले रखने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार चेतावनी दे रही हैं कि किसी भी सैन्य टकराव से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की ओर से ब्रिटेन को दी गई चेतावनी केवल राजनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि संघर्ष बढ़ने की स्थिति में अमेरिका के सहयोगी देश भी प्रभावित हो सकते हैं। ईरान द्वारा ब्रिटेन को दी गई चेतावनी ने अमेरिका-ईरान तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि अभी तक ब्रिटेन सीधे संघर्ष में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन ईरान का बयान यह दिखाता है कि किसी भी सैन्य गठजोड़ या समर्थन को वह गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों के कदम इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
