culture
समुद्र के बीचों-बीच खड़ा अजेय जलदुर्ग! मुरुड-जंजीरा किले का रोमांचक इतिहास, अभेद्य वास्तुकला और अनसुने रहस्य
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में मुरुड तट से अरब सागर के बीच स्थित मुरुड-जंजीरा किला भारत के सबसे अभेद्य समुद्री किलों में से एक माना जाता है। अनेक विदेशी शक्तियों और मराठा साम्राज्य ने इस किले पर कब्जा करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कोई भी इसे जीत नहीं सका। सिद्दी शासकों का वैभव, मजबूत किलेबंदी, मीठे पानी के तालाब और अद्भुत स्थापत्य कला आज भी इस किले को इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनाते हैं।
Priyanka Gaikwad29 जुल. 2026, 02:09 PM IST

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड गांव के पास अरब सागर के बीच लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में स्थित मुरुड-जंजीरा किला भारत की समुद्री विरासत का एक अनमोल प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि 'जंजीरा' शब्द अरबी भाषा के 'जज़ीरा' से निकला है, जिसका अर्थ होता है 'द्वीप'। इस किले की शुरुआत स्थानीय कोली समुदाय ने लकड़ी की सुरक्षा दीवार के रूप में की थी। बाद में 15वीं और 16वीं शताब्दी के दौरान सिद्दी शासकों ने इसे विशाल पत्थरों से बने मजबूत समुद्री किले का रूप दिया। खारे समुद्री पानी के बीच सदियों से खड़ा होने के बावजूद यह किला आज भी अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध है।
मुरुड-जंजीरा किले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था है। किले के चारों ओर लगभग 40 फीट ऊंची विशाल दीवार बनाई गई है, जिसमें 19 मजबूत बुर्ज हैं। इसका मुख्य प्रवेश द्वार समुद्र की ओर इस प्रकार बनाया गया है कि दूर से आसानी से दिखाई नहीं देता, जिससे दुश्मनों के लिए अचानक हमला करना बेहद कठिन हो जाता था। इतिहास के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज ने कई बार इस किले को जीतने का प्रयास किया। इसके बाद छत्रपति संभाजी महाराज ने भी अभियान चलाया, लेकिन सिद्दी शासकों की मजबूत रक्षा व्यवस्था के कारण यह किला कभी मराठा साम्राज्य के अधीन नहीं आ सका। यही कारण है कि जंजीरा को भारत के गिने-चुने अजेय किलों में शामिल किया जाता है।
किले के भीतर आज भी मीठे पानी के दो बड़े तालाब मौजूद हैं। समुद्र के बीच स्थित होने के बावजूद इन तालाबों में मीठा पानी उपलब्ध होना उस समय की अद्भुत इंजीनियरिंग और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसके अलावा यहां महल के अवशेष, मस्जिद, सैनिकों के आवास, अनाज भंडार और कई ऐतिहासिक संरचनाएं आज भी देखने को मिलती हैं। किले में 'कलाल बांगड़ी', 'चावरी' और 'लांडा कसम' नाम की तीन विशाल तोपें भी मौजूद हैं। इनमें 'कलाल बांगड़ी' भारत की सबसे बड़ी ऐतिहासिक तोपों में से एक मानी जाती है। ये तोपें उस दौर की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य शक्ति की गवाही देती हैं।
आज पर्यटक मुरुड समुद्र तट से नाव के माध्यम से इस ऐतिहासिक किले तक पहुंच सकते हैं। समुद्र की रोमांचक यात्रा, विशाल किलेबंदी, ऐतिहासिक इमारतें और प्राकृतिक सौंदर्य हर वर्ष हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि मुरुड-जंजीरा किला महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। इतिहास, शौर्य, स्थापत्य कला और समुद्री सुरक्षा का अद्भुत संगम मुरुड-जंजीरा किले को भारत की ऐतिहासिक धरोहरों में विशेष स्थान दिलाता है। यह किला न केवल महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है, बल्कि हर इतिहास प्रेमी और पर्यटक के लिए जीवन में एक बार अवश्य देखने योग्य स्थल भी है।
