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करोड़ों की लागत वाले ऑक्सीजन प्लांट नहीं आए काम? CAG रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

CAG की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पश्चिम बंगाल में PM CARES और CSR फंड से स्थापित आधे से अधिक PSA मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट कोविड-19 महामारी के बाद भी चालू नहीं हो सके। रिपोर्ट में अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन ढांचे के रखरखाव और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए केवल बुनियादी ढांचा बनाना नहीं, बल्कि उसका नियमित संचालन और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।

Vindhya Dubey29 जुल. 2026, 02:10 PM IST
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करोड़ों की लागत वाले ऑक्सीजन प्लांट नहीं आए काम? CAG रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल


बंगाल: कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कई कमजोरियों को उजागर किया था। इसी संकट से निपटने के लिए PM CARES फंड और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन (PSA) मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। अब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पश्चिम बंगाल में लगाए गए ऐसे आधे से अधिक ऑक्सीजन प्लांट कोविड महामारी समाप्त होने के बाद भी चालू नहीं हो सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई अस्पतालों में PM CARES से उपलब्ध कराए गए वेंटिलेटर भी लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाए गए।

CAG रिपोर्ट में क्या सामने आया?
CAG की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में PM CARES और CSR सहायता से स्थापित PSA ऑक्सीजन प्लांटों का बड़ा हिस्सा तकनीकी, रखरखाव, बिजली आपूर्ति, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी या अन्य परिचालन कारणों से कार्यशील नहीं था। कई अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कोविड प्रबंधन के लिए उपलब्ध कुछ संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया।

PSA ऑक्सीजन प्लांट क्या होते हैं?
PSA (Pressure Swing Adsorption) ऑक्सीजन प्लांट अस्पताल परिसर में ही वातावरण की हवा से मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन तैयार करते हैं। कोविड महामारी के दौरान इन प्लांटों का उद्देश्य अस्पतालों को बाहरी ऑक्सीजन सिलेंडरों पर निर्भरता से मुक्त करना था। ऐसे प्लांट आपातकालीन परिस्थितियों में लगातार ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भविष्य की किसी भी स्वास्थ्य आपदा में जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।

महामारी के दौरान क्यों थे इतने जरूरी?
कोविड की दूसरी लहर के दौरान देश के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी गई थी। इसी अनुभव के बाद केंद्र सरकार ने PM CARES फंड के माध्यम से देशभर के सरकारी अस्पतालों में सैकड़ों PSA ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की योजना शुरू की थी, ताकि भविष्य में ऑक्सीजन की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।

CAG की रिपोर्ट केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण जितना जरूरी है, उसका नियमित संचालन, रखरखाव, तकनीकी निगरानी और प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उतने ही आवश्यक हैं। यदि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सुविधाएं उपयोग में नहीं आतीं, तो आपदा के समय उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

क्या हो सकते हैं इसके प्रभाव?
यदि ऑक्सीजन प्लांट पूरी क्षमता से चालू किए जाते हैं, तो अस्पतालों को मेडिकल ऑक्सीजन के लिए बाहरी आपूर्ति पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराना आसान होगा, परिवहन लागत कम होगी और स्वास्थ्य प्रणाली अधिक आत्मनिर्भर बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित ऑडिट, समय पर रखरखाव, तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति और जवाबदेही तय करने से ऐसी परियोजनाओं की उपयोगिता काफी बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी से मिली सबसे बड़ी सीख यह है कि केवल नई स्वास्थ्य सुविधाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। उनकी कार्यक्षमता, रखरखाव, समय-समय पर निरीक्षण और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। CAG की रिपोर्ट इस दिशा में स्वास्थ्य प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और सुधार का अवसर मानी जा रही है।