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भारत में आएंगे ₹10-20 के प्लास्टिक नोट, मोदी सरकार ने RBI के प्रस्ताव को दी मंजूरी l

भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोटों का ट्रायल शुरू हो सकता है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के मुताबिक, शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट फील्ड ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे। ट्रायल सफल रहने पर इन्हें नियमित रूप से चलन में लाने की योजना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी करेंसी को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Kashish Rai30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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भारत में आएंगे ₹10-20 के प्लास्टिक नोट, मोदी सरकार ने RBI के प्रस्ताव को दी मंजूरी l

देश में करेंसी को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ₹10 और ₹20 के पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। सरकार ने इसकी जानकारी संसद में साझा की है।

प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआत में ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट तैयार कर फील्ड ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों को आम लोगों के बीच सीमित स्तर पर चलाकर उनकी उपयोगिता, टिकाऊपन और व्यवहारिकता का आकलन किया जाएगा।

अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में इन पॉलिमर नोटों को नियमित रूप से जारी करने की योजना बनाई जा सकती है। हालांकि, अभी इसे शुरुआती चरण की परियोजना माना जा रहा है और देश की पूरी करेंसी व्यवस्था को प्लास्टिक नोटों में बदलने का कोई फैसला नहीं हुआ है।

क्या कागजी नोट बंद हो जाएंगे?

सरकार ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर दी है। पॉलिमर नोटों के आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे। ₹10 और ₹20 के मौजूदा कागजी नोट पहले की तरह बाजार में चलते रहेंगे। सरकार के मुताबिक, फिलहाल देश में चल रहे कागजी नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यानी शुरुआती दौर में प्लास्टिक और कागजी दोनों तरह के नोट एक साथ चल सकते हैं।

क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक नोट?

पॉलिमर नोटों को पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ माना जाता है। इनकी आयु अधिक होने, पानी और नमी से अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से बचने तथा रोजमर्रा के इस्तेमाल में कम खराब होने की उम्मीद है। पॉलिमर करेंसी में सुरक्षा फीचर भी अलग तरीके से शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोट तैयार करना मुश्किल हो सकता है। नोटों की लंबी उम्र के कारण लंबे समय में करेंसी की छपाई और उसे बदलने से जुड़ी लागत में कमी आने की संभावना भी जताई जाती है। हालांकि, भारत में पॉलिमर नोटों की परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए इनके वास्तविक फायदे और लागत का आकलन फील्ड ट्रायल और आगे के अनुभव के आधार पर ही किया जाएगा।

भारत में पहली बार नहीं, दुनिया में पहले से इस्तेमाल

प्लास्टिक करेंसी भारत के लिए नई जरूर होगी, लेकिन दुनिया के कई देशों में पॉलिमर नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहली बार पॉलिमर करेंसी नोट पेश किए थे। इसके बाद कई अन्य देशों ने भी इस तरह की करेंसी को अपनाया। आज 50 से ज्यादा देशों में किसी न किसी रूप में पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें खास तौर पर टिकाऊपन, सुरक्षा और लंबी अवधि तक इस्तेमाल किए जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

RBI ने शुरू की तैयारी

पॉलिमर नोटों को लेकर RBI की ओर से तैयारियां पहले से चल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों के पायलट प्रोजेक्ट के लिए टेंडर भी जारी किया गया है और इस परियोजना के लिए वैश्विक स्तर पर आवेदन मांगे गए हैं। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। आने वाले समय में फील्ड ट्रायल के जरिए यह देखा जाएगा कि भारत की जलवायु और बड़े पैमाने पर नकदी के इस्तेमाल को देखते हुए पॉलिमर नोट कितने प्रभावी साबित होते हैं। फिलहाल डिजिटल पेमेंट व्यवस्था पर भी इन नोटों के नियमित रूप से जारी होने के बाद असर का आकलन किया जाएगा। यानी भारत में करेंसी का भविष्य केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि नकदी को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के विकल्पों पर भी काम जारी है।