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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: EWS आरक्षण के लिए ₹8 लाख आय सीमा 'उचित'! लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी

EWS आरक्षण की आय सीमा को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। अदालत ने कहा कि ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा पहली नजर में उचित लगती है, हालांकि इसकी संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: EWS आरक्षण के लिए ₹8 लाख आय सीमा 'उचित'! लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी

नई दिल्ली: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के लिए तय ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सीमा प्रथम दृष्टया (Prima Facie) उचित प्रतीत होती है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है और मामले की विस्तृत सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ 2021 में दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा NEET-UG 2021 के अखिल भारतीय कोटा (AIQ) की मेडिकल सीटों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अधिसूचना को चुनौती दी गई है।


सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि चूंकि यह मामला वर्ष 2021 के NEET प्रवेश से जुड़ा है, इसलिए यह काफी हद तक निष्प्रभावी (Infructuous) हो चुका है। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने दलील दी कि भले ही 2021 की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन EWS के लिए निर्धारित ₹8 लाख आय सीमा की वैधानिकता का प्रश्न अब भी जीवित है और इस पर न्यायालय का निर्णय आवश्यक है। उन्होंने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने EWS मानदंडों की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति (पांडे समिति) का गठन किया था। समिति ने ₹8 लाख की आय सीमा को बरकरार रखने की सिफारिश की थी, लेकिन यह भी सुझाव दिया था कि जिन परिवारों के पास 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि हो, उन्हें आय की परवाह किए बिना EWS का लाभ नहीं मिलना चाहिए।


₹8 लाख की सीमा 'प्रथम दृष्टया उचित'

याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति आलोक आराधे ने मौखिक रूप से कहा कि ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा प्रथम दृष्टया एक "उचित" मानदंड प्रतीत होती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक टिप्पणी है और इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद ही दिया जाएगा।


अदालत ने सुनवाई क्यों टाली?

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज उपलब्ध नहीं थे। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता से सभी संबंधित याचिकाओं और उनमें उठाए गए मुद्दों की सूची तैयार करने को कहा तथा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी मामले में सहायता देने का अनुरोध किया।


क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने NEET-UG के अखिल भारतीय कोटा (AIQ) की मेडिकल सीटों में OBC के लिए 27 प्रतिशत और EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। इस निर्णय को कई याचिकाओं के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने 2021-22 की प्रवेश प्रक्रिया के लिए OBC और EWS आरक्षण को जारी रखने की अनुमति दे दी थी। साथ ही अदालत ने कहा था कि EWS के लिए निर्धारित ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा की वैधता पर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा। इसी कारण यह मुद्दा अब भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। इससे पहले नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने जनहित अभियान बनाम भारत संघ मामले में 103वें संविधान संशोधन को वैध ठहराते हुए EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को संवैधानिक माना था। हालांकि वर्तमान याचिका विशेष रूप से ₹8 लाख आय सीमा और उससे जुड़े पात्रता मानदंडों की वैधता पर केंद्रित है।


मामले का विवरण

मामला: Neil Aurelio Nunes & Others बनाम Union of India & Others

याचिका संख्या: W.P. (Civil) No. 961/2021

पीठ: न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति आलोक आराधे

मुख्य मुद्दा: EWS आरक्षण के लिए ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा की वैधता तथा NEET-UG के अखिल भारतीय कोटा में OBC और EWS आरक्षण से जुड़े मानदंड।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत की यह टिप्पणी केवल प्रथम दृष्टया (Prima Facie) राय है और अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद सुनाया जाएगा।