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वर्क फ्रॉम होम के नाम पर महिला से ₹7.66 लाख की ऑनलाइन ठगी l
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक 36 वर्षीय महिला ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम नौकरी के झांसे में आकर ₹7,66,800 की साइबर ठगी का शिकार हो गई। सोशल मीडिया पर नौकरी का विज्ञापन देखने के बाद महिला ने संपर्क किया, जिसके बाद उसे टेलीग्राम के माध्यम से होटल रेटिंग का काम देने का दावा किया गया। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ राशि वापस की गई, लेकिन बाद में तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर उससे बार-बार पैसे जमा कराए गए। अंततः महिला से कुल ₹7.66 लाख की ठगी कर ली गई। मामले में कोपरी पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम नौकरी का झांसा देकर एक 36 वर्षीय महिला से ₹7,66,800 की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़िता की पहचान उमा नरखेडे के रूप में हुई है, जो वर्तमान में मुंबई के विक्रोली क्षेत्र में रहती हैं और पहले ठाणे के कोपरी इलाके में निवास करती थीं। इस मामले में कोपरी पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, उमा नरखेडे नौकरी की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान 14 अप्रैल 2026 को उन्हें सोशल मीडिया पर एक वर्क फ्रॉम होम नौकरी का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में दावा किया गया था कि घर बैठे ऑनलाइन होटलों की रेटिंग देकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। नौकरी की आवश्यकता होने के कारण उन्होंने विज्ञापन में दिए गए ईमेल पते पर संपर्क किया।
संपर्क करने के कुछ समय बाद साइबर ठगों ने महिला को टेलीग्राम का एक लिंक भेजा और एक समूह में जोड़ दिया। वहां उन्हें बताया गया कि उनका काम विभिन्न होटलों को ऑनलाइन रेटिंग देना और कुछ आसान ऑनलाइन टास्क पूरे करना होगा। शुरुआत में उन्हें कुछ छोटे-छोटे कार्य दिए गए और फिर उनसे ₹10,000 जमा कराने के लिए कहा गया। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए यह राशि कुछ समय बाद वापस भी कर दी। पैसे वापस मिलने पर महिला को लगा कि यह नौकरी और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह वास्तविक है।
महिला का विश्वास जीतने के बाद ठगों ने उन्हें अधिक कमाई का लालच देना शुरू किया। अलग-अलग टास्क पूरे करने, प्रीमियम कार्य प्राप्त करने और अधिक कमीशन पाने के नाम पर उनसे लगातार बड़ी रकम जमा कराई गई। हर बार यह भरोसा दिलाया गया कि कार्य पूरा होने के बाद जमा की गई पूरी राशि और उसका लाभ एक साथ वापस कर दिया जाएगा।
कुछ समय बाद आरोपियों ने महिला को बताया कि उनके खाते में तकनीकी गड़बड़ी आ गई है या किसी गलत लेनदेन के कारण उनका अकाउंट अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि खाते को दोबारा सक्रिय करने, भुगतान जारी करने और पहले जमा किए गए पैसे निकालने के लिए अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी। महिला ने अपना पहले से जमा पैसा वापस पाने की उम्मीद में आरोपियों के निर्देशों का पालन करते हुए बार-बार ऑनलाइन भुगतान किया।
इस दौरान हर बार कोई न कोई नया कारण बताकर उनसे और पैसे जमा कराने की मांग की गई। कभी तकनीकी त्रुटि, कभी सुरक्षा सत्यापन, कभी खाते को अनलॉक करने और कभी भुगतान जारी करने का बहाना बनाकर लगातार रकम ली जाती रही। महिला को यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि अगला भुगतान करते ही उनकी पूरी राशि और कमीशन एक साथ उनके खाते में भेज दिया जाएगा।
इस तरह महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से कुल ₹7,66,800 आरोपियों के बताए बैंक खातों और ऑनलाइन माध्यमों में ट्रांसफर कर दिए। जब लगातार भुगतान करने के बावजूद न तो उनकी जमा राशि वापस मिली और न ही किसी प्रकार का कमीशन मिला, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।
इसके बाद महिला ने पूरे मामले की शिकायत कोपरी पुलिस में दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन, टेलीग्राम पर इस्तेमाल किए गए अकाउंट, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
यह मामला एक बार फिर उन ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम, होटल रेटिंग, टास्क आधारित कमाई और निवेश जैसे साइबर घोटालों की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिनमें पहले छोटी राशि लौटाकर पीड़ित का विश्वास जीता जाता है। इसके बाद अधिक कमाई, बोनस और कमीशन का लालच देकर लगातार बड़ी रकम जमा कराई जाती है। अंत में तकनीकी समस्या, अकाउंट ब्लॉक होने या भुगतान अटकने का बहाना बनाकर और पैसे वसूले जाते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे नौकरी के प्रस्तावों, टेलीग्राम के माध्यम से मिलने वाले टास्क और अग्रिम भुगतान की मांग करने वाले किसी भी ऑफर पर बिना पूरी जांच किए भरोसा न करें।
