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ठाणे में ‘समाधान शिविर’ का असर – एक ही दिन में 7 हजार से ज्यादा आवेदनों का निपटारा

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में ‘छत्रपति शिवाजी महाराज समाधान शिविर’ अभियान ने शानदार शुरुआत की है। पहले ही दिन 7 हजार से ज्यादा आवेदनों का निपटारा कर प्रशासन ने लोगों को बड़ी राहत दी। इस पहल के तहत नागरिकों को एक ही स्थान पर कई सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

Kashish Rai30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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ठाणे में ‘समाधान शिविर’ का असर – एक ही दिन में 7 हजार से ज्यादा आवेदनों का निपटारा

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से ‘छत्रपति शिवाजी महाराज समाधान शिविर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मकसद है कि लोगों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सभी जरूरी सेवाएं एक ही जगह पर आसानी से मिल सकें। जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पाचाळ के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान को पहले ही दिन जबरदस्त सफलता मिली। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पहले ही दिन 7 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा किया गया, जो इस पहल की प्रभावशीलता को दर्शाता है। बड़ी संख्या में नागरिकों ने शिविर में पहुंचकर अपनी समस्याएं दर्ज कराईं और मौके पर ही समाधान पाया।


यह अभियान 22 जुलाई से 2 अगस्त तक जिले के सभी 18 विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंच सकें। ठाणे के कोपरी-पाचपाखाड़ी और ऐरोली क्षेत्रों में सबसे अधिक, करीब 5 हजार से ज्यादा आवेदन निपटाए गए। इसके अलावा कल्याण ग्रामीण क्षेत्र में 1,946 और उल्हासनगर में 754 नागरिकों को सीधे लाभ मिला। शिविरों में नागरिकों को भूमि और राजस्व से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे 7/12 उतारा, संपत्ति पत्र (मालमत्ता रिकॉर्ड), डिजिटल सातबारा, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आधार कार्ड सुधार और आयुष्मान भारत कार्ड जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों का समय, पैसा और मेहनत—तीनों की बचत हो रही है।


इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर ही दिया जा रहा है। इनमें संजय गांधी निराधार योजना, श्रावणबाळ योजना, लाडली योजना और मातृवंदना योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के जरिए पात्र लाभार्थियों को सीधे सहायता प्रदान की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के शिविरों से न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। ‘समाधान शिविर’ जैसे प्रयास सरकार और जनता के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहे हैं।