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'आशीर्वाद' पर अंधविश्वास फैलाने वालों पर हाईकोर्ट की सख्ती! राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को 'भूतिया' बताने पर लगाई रोक

मुंबई के प्रतिष्ठित 'आशीर्वाद' बंगले को लेकर वर्षों से चल रही अफवाहों पर अब न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मीडिया संस्थानों और कुछ यूट्यूब चैनलों को राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को 'भूतिया', 'शापित', 'मनहूस' या 'अपशकुनी' बताने से रोक दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सनसनी फैलाने वाली ऐसी सामग्री किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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'आशीर्वाद' पर अंधविश्वास फैलाने वालों पर हाईकोर्ट की सख्ती! राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को 'भूतिया' बताने पर लगाई रोक

मुंबई: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के प्रतिष्ठित 'आशीर्वाद' बंगले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने मीडिया संस्थानों और कुछ यूट्यूब चैनलों को निर्देश दिया है कि वे इस ऐतिहासिक संपत्ति के बारे में "भूतिया (Haunted)", "शापित (Cursed)", "मनहूस (Unlucky)" या "अपशकुनी (Ill-omened)" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कोई भी मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित न करें। अदालत ने माना कि इस प्रकार की सामग्री वर्तमान मालिक की प्रतिष्ठा और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला कारोबारी शशि किरण शेट्टी द्वारा दायर एक दीवानी वाद (Suit) से जुड़ा है। शेट्टी, जिन्होंने वर्षों पहले राजेश खन्ना के समुद्र किनारे स्थित प्रसिद्ध 'आशीर्वाद' बंगले को खरीदा था, पुराने ढांचे को हटाकर नया भवन तैयार कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने इस संपत्ति का नाम 'आशीर्वाद' ही बरकरार रखा। याचिका में कहा गया कि कई मीडिया रिपोर्टों और यूट्यूब वीडियो में इस बंगले को "शापित", "भूतिया" और "मनहूस" बताया गया। कुछ रिपोर्टों में तो यह दावा भी किया गया कि इस बंगले ने तीन सुपरस्टारों का करियर खत्म कर दिया और इसे मुंबई की सबसे भूतिया जगहों में शामिल किया गया। शेट्टी ने अदालत से कहा कि ऐसे दावे पूरी तरह निराधार हैं और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।


हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति अरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया माना कि वादी ने अंतरिम राहत पाने के लिए मजबूत मामला स्थापित किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया प्रकाशित सामग्री मानहानिकारक प्रतीत होती है क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि वादी एक कथित "भूतिया" और "शापित" बंगले में रह रहे हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे प्रकाशन वादी के गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन कर सकते हैं।


प्रतिवादियों की अनुपस्थिति पर भी जताई नाराजगी

अदालत ने अपने 24 जुलाई 2026 के अंतरिम आदेश में यह भी दर्ज किया कि नोटिस दिए जाने के बावजूद कई प्रतिवादी मीडिया संस्थान और यूट्यूब चैनल अदालत में उपस्थित नहीं हुए और न ही उन्होंने अपने प्रकाशनों का कोई औचित्य प्रस्तुत किया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह सामग्री केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई प्रतीत होती है, जिससे वादी को बिना किसी गलती के नुकसान पहुंच सकता है। इसी आधार पर अदालत ने अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया।


कौन-कौन हैं मामले के पक्षकार?

वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. बिरेंद्र सराफ ने पैरवी की। मामले का शीर्षक Shashi Kiran Shetty v. Scoopwhoop Media Pvt. Ltd. एवं अन्य है। यह वाद Suit (L) No. 18587 of 2026 के रूप में बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है। आदेश 24 जुलाई 2026 को पारित किया गया था, जबकि इसकी जानकारी 29 जुलाई 2026 को सार्वजनिक हुई। अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

'आशीर्वाद' बंगले का इतिहास

मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड पर बना 'आशीर्वाद' बंगला राजेश खन्ना की पहचान बन चुका था। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद यह संपत्ति उनकी बेटियों ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना के परिवार द्वारा कारोबारी शशि किरण शेट्टी को बेची गई थी। बाद में पुराने ढांचे को हटाकर नया भवन बनाया गया, लेकिन 'आशीर्वाद' नाम यथावत रखा गया। यही कारण है कि यह संपत्ति आज भी करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक महत्व रखती है।