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फ्रॉड ऐप कांड: हैदराबाद में गूगल इंडिया के नोडल अधिकारी पर FIR, निवेश के नाम पर लाखों की ठगी l

हैदराबाद में ऑनलाइन निवेश के नाम पर हो रही ठगी के मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए गूगल इंडिया के नोडल अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध एक फर्जी ऐप के जरिए लोगों को निवेश का झांसा देकर लाखों रुपये ठगे गए। एक 58 वर्षीय व्यक्ति ने करीब 8 लाख रुपये गंवाने की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और तकनीकी टीमों की मदद से ऐप के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

Kashish Rai30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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फ्रॉड ऐप कांड: हैदराबाद में गूगल इंडिया के नोडल अधिकारी पर FIR, निवेश के नाम पर लाखों की ठगी l

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक फर्जी निवेश ऐप के जरिए लोगों से लाखों रुपये की ठगी की गई। इस मामले में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए गूगल इंडिया के नोडल अधिकारी के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, यह फ्रॉड ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था और इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह एक वैध निवेश प्लेटफॉर्म जैसा दिखाई दे। ऐप के माध्यम से यूजर्स को शेयर बाजार और अन्य योजनाओं में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था। शुरुआत में कुछ छोटे रिटर्न दिखाकर यूजर्स का भरोसा जीता जाता था, जिसके बाद उनसे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी।


इसी तरह के एक मामले में 58 वर्षीय एक व्यक्ति ने इस ऐप के जरिए करीब 8 लाख रुपये का निवेश किया। कुछ समय तक ऐप पर लाभ दिखने के बाद अचानक प्लेटफॉर्म बंद हो गया और निवेश की गई पूरी रकम गायब हो गई। जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उसने हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 20 जून से 15 जुलाई के बीच ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने इसी तरह की ठगी की शिकायत की है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा है।


मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गूगल इंडिया के नोडल अधिकारी को भी FIR में नामजद किया है। आरोप है कि गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध ऐप्स की निगरानी और सत्यापन में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते यह फर्जी ऐप लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहा और लोगों को नुकसान पहुंचाता रहा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर प्लेटफॉर्म कंपनियां तभी जिम्मेदार मानी जाती हैं जब उन्हें किसी फर्जी कंटेंट या ऐप की जानकारी मिलने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं की जाती। इस मामले में यह जांच का विषय है कि संबंधित अधिकारियों को इस ऐप के बारे में कब जानकारी मिली और उन्होंने क्या कदम उठाए।


हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही, तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से ऐप के सर्वर, डेवलपर्स और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस फ्रॉड नेटवर्क का संचालन देश के भीतर हो रहा था या इसके तार अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े हैं। इसके अलावा, व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन और संदिग्ध बैंक खाताधारकों की भी पहचान की जा रही है, जिनके जरिए पैसे का लेन-देन हुआ।


एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म समय पर कार्रवाई नहीं करता और फर्जी ऐप्स को हटाने में देरी करता है, तो उसे भी आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश के जोखिमों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करने से पहले किसी भी ऐप या प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की पूरी जांच करनी चाहिए और अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए।


पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध निवेश योजना से दूर रहें और यदि उन्हें ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में सूचना दें। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि पुलिस लगातार डिजिटल सबूत जुटाने और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह मामला देशभर में साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस का कारण बन सकता है।