sports
आर. अश्विन ने क्यों कहा 'मैं सारांश जैन को बहुत ऊंचा मानता हूं'? 33 साल की उम्र में पहली बार टीम इंडिया में मिली जगह के पीछे की पूरी कहानी
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टीम में शामिल किए गए 33 वर्षीय ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन की रविचंद्रन अश्विन ने खुलकर तारीफ की है। अश्विन ने उन्हें एक बेहतरीन ऑफ स्पिनर बताते हुए कहा कि वह उन्हें बहुत ऊंचा मानते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन और लंबे संघर्ष के बाद सारांश को टीम इंडिया में जगह मिली है, जिसे भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
Vindhya Dubey30 जुल. 2026, 07:17 PM IST

भारतीय क्रिकेट टीम ने श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए अनुभवी घरेलू क्रिकेटर सारांश जैन को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। 33 वर्षीय ऑफ स्पिन ऑलराउंडर को चोटिल वॉशिंगटन सुंदर के स्थान पर टीम में मौका मिला है। इस चयन के बाद भारत के महान ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने सारांश जैन की खुलकर तारीफ करते हुए कहा, "मैं उसे बहुत ऊंचा मानता हूं।" अश्विन का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारतीय क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजी को लेकर उनकी राय को काफी सम्मान दिया जाता है।
अश्विन ने क्या कहा?
अपने विश्लेषण में अश्विन ने कहा कि सारांश जैन उन खिलाड़ियों में से हैं जो केवल बल्लेबाजी करने वाले स्पिनर नहीं हैं, बल्कि एक वास्तविक ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने कहा कि सारांश के पास गेंद को लगातार सही जगह पर डालने की क्षमता, लंबी स्पेल फेंकने का धैर्य और विकेट लेने की मानसिकता है। अश्विन ने यह भी कहा कि घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें लंबे समय से अवसर मिलना चाहिए था और अब चयनकर्ताओं ने सही फैसला लिया है।
कौन हैं सारांश जैन?
मध्य प्रदेश के इंदौर से आने वाले सारांश जैन पिछले एक दशक से अधिक समय से घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं। वह दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज और बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज हैं। रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और इंडिया ए के लिए लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली थी। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार घरेलू क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित करते रहे।
घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड
सारांश जैन ने रणजी ट्रॉफी में मध्य प्रदेश के लिए लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट लेने के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी रन भी बनाए। हालिया घरेलू सत्र में उन्होंने 30 विकेट लेने के अलावा 500 से अधिक रन भी बनाए, जिससे चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया। वह उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जो गेंद और बल्ले दोनों से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
33 साल की उम्र में मिला पहला मौका
भारतीय क्रिकेट में आमतौर पर युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन सारांश जैन का चयन इस बात का संकेत है कि चयन समिति अब घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन को भी उतना ही महत्व दे रही है। 33 वर्ष की उम्र में टेस्ट टीम में पहली बार जगह बनाना उनकी मेहनत, धैर्य और निरंतरता का परिणाम माना जा रहा है। चयन समिति ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि कोई खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है तो उम्र उसके चयन में बाधा नहीं बनेगी।
संघर्ष से भरा रहा सफर
सारांश जैन का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा। रिपोर्टों के अनुसार उनके परिवार ने उनके करियर के लिए कई त्याग किए। उनके पिता ने अपनी गंभीर बीमारी की जानकारी लंबे समय तक उनसे छिपाई ताकि उनका ध्यान क्रिकेट से न भटके, जबकि उनके भाई ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए अपने क्रिकेट करियर से समझौता किया। यह संघर्ष उनकी सफलता को और भी प्रेरणादायक बनाता है।
हरभजन सिंह का भी मिला साथ
पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने भी सारांश जैन की गेंदबाजी की तारीफ की है। हरभजन का मानना है कि सारांश की सबसे बड़ी ताकत विकेट लेने की भूख और पारंपरिक ऑफ स्पिन गेंदबाजी है। उन्होंने उन्हें केवल पार्ट-टाइम गेंदबाज नहीं बल्कि एक विशेषज्ञ स्पिनर बताया। अनुभवी स्पिनरों का यह समर्थन बताता है कि भारतीय क्रिकेट में सारांश की तकनीकी क्षमता को काफी सम्मान दिया जाता है।
श्रीलंका दौरे में क्या होगी भूमिका?
श्रीलंका की पिचें पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में सारांश जैन को टेस्ट टीम में शामिल करना रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो वह लंबे स्पेल डालकर विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी रन भी जोड़ सकते हैं। सारांश जैन का चयन भारतीय घरेलू क्रिकेट खेलने वाले हजारों खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का संदेश है। यह दिखाता है कि यदि कोई खिलाड़ी लगातार प्रदर्शन करता रहे तो उसे देर से ही सही, राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। साथ ही यह चयन भारतीय टेस्ट टीम में अनुभवी घरेलू खिलाड़ियों की भूमिका को भी मजबूत करता है।
सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम में चयन केवल एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतर मेहनत और घरेलू क्रिकेट की अहमियत का उदाहरण है। रविचंद्रन अश्विन जैसे महान स्पिनर का उन पर भरोसा इस बात का संकेत है कि भारतीय टीम को एक ऐसा ऑफ स्पिन ऑलराउंडर मिला है जो आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब सभी की निगाहें श्रीलंका दौरे पर होंगी कि क्या सारांश जैन अपने पहले ही अवसर को यादगार बना पाते हैं।
