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गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास, राष्ट्रमंडल खेलों की 10,000 मीटर दौड़ में भारत को दिलाया पहला पुरुष पदक
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। यह उपलब्धि भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है और भविष्य में विश्व चैंपियनशिप तथा ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भारत की पदक उम्मीदों को भी मजबूत करती है।
Vindhya Dubey30 जुल. 2026, 07:17 PM IST

भारतीय एथलेटिक्स के लिए राष्ट्रमंडल खेल 2026 से एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारत के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
ग्लासगो में आयोजित इस मुकाबले में शुरुआत से ही तेज़ रफ्तार देखने को मिली। गुलवीर सिंह ने जल्दबाज़ी दिखाने के बजाय अपनी रणनीति के अनुसार दौड़ लगाई। उन्होंने शुरुआती चरण में खुद को शीर्ष धावकों के साथ बनाए रखा और अंतिम लैप में शानदार गति दिखाते हुए दूसरे स्थान पर फिनिश किया। कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उनका संतुलित प्रदर्शन भारतीय दल के लिए बड़ी सफलता साबित हुआ।
गुलवीर सिंह पिछले कुछ वर्षों में भारत के सबसे भरोसेमंद लंबी दूरी के धावकों में शामिल होकर उभरे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। एशियाई खेलों और एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद अब राष्ट्रमंडल खेलों में उनका यह रजत पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
इस जीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत को पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहली बार पदक मिला है। अब तक इस स्पर्धा में अफ्रीकी देशों, विशेषकर केन्या और युगांडा के धावकों का दबदबा रहा है। ऐसे में भारतीय एथलीट का इस स्तर पर पोडियम तक पहुंचना बताता है कि भारत अब लंबी दूरी की दौड़ में भी दुनिया की मजबूत टीमों को चुनौती देने लगा है।
गुलवीर सिंह की सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने भाला फेंक, निशानेबाजी, मुक्केबाजी और भारोत्तोलन जैसे खेलों में लगातार सफलता हासिल की है, लेकिन ट्रैक इवेंट्स, खासकर लंबी दूरी की दौड़ में ऐसी उपलब्धियां बेहद कम देखने को मिली हैं। ऐसे में यह पदक युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और देश में इस स्पर्धा के प्रति रुचि भी बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन का प्रभाव केवल एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहेगा। इससे लंबी दूरी की दौड़ के लिए बेहतर प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। यदि इसी तरह खिलाड़ियों को समर्थन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है।
गुलवीर सिंह की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने लगातार मेहनत, अनुशासन और धैर्य के दम पर खुद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इतिहास रचने तक का उनका सफर देश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मिला यह रजत पदक भारत के पदक अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि भारतीय एथलेटिक्स अब केवल कुछ चुनिंदा स्पर्धाओं तक सीमित नहीं है। ट्रैक इवेंट्स में भी भारत का भविष्य लगातार मजबूत हो रहा है और गुलवीर सिंह की यह ऐतिहासिक उपलब्धि उसी बदलते दौर की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है।
